आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी विप्रो (Wipro) के फ्रेशर्स को दोहरी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पहले तो उनके पैकेज में 46 फीसदी की कटौती हुई और अब उनके सामने कंपनी से बाहर निकलने का खतरा मंडरा रहा है। मामला यह है कि विप्रो ने उन फ्रेशर्स को जिनके पैकेज को 6.5 लाख रुपये से 3.5 लाख रुपये कर दिया गया था, उन्हें अब एक टेस्ट देने को कहा जा रहा है। यह एक फ्रेश प्रोग्राम प्रोजेक्ट रेडीनेस प्रोग्राम (PRP) है और कंपनी ने इन फ्रेशर्स को जो मेल भेजा है, उसके मुताबिक इसे पास करना उनके लिए बहुत जरूरी है। अगर इस टेस्ट में ये फेल हो जाते हैं तो उन्हें कंपनी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। इससे पहले जनवरी में कंपनी ने इनटर्नल टेस्ट में फेल होने के चलते 450 से अधिक ट्रेनी को टर्मिनेट कर दिया था।
आईटी यूनियन का ये है आरोप
पुणे की आईटी यूनियन ने इसे लेकर विप्रो पर आरोप लगाया है कि कंपनी जो कर रही है, वह पूरी तरह से अनैतिक और अनुचित और अन्याय है। यूनियन का आरोप है कि ये कैंडिडेट्स पहले ही चार से छह महीने के लिए वेलोसिटी ट्रेनिंग का हिस्सा रह चुके हैं और उनसे कंपनी ने वायदा किया था कि इस प्रोग्राम के बाद आगे कोई ट्रेनिंग नहीं होगी। यह ट्रेनिंग पैकेज को 3.5 लाख रुपये से 6.5 लाख रुपये सालाना करने का हिस्सा था। हालांकि अब कंपनी पैकेज घटाने के बाद एक और ट्रेनिंग पर भी जोर दे रही है। नैसेंट इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एंप्लॉयीज सीनेट (NITES) के प्रेसिडेंट हरप्रीत सलूजा का कहना है कि मिसलीडिंग कम्यूनिकेशन और नीतियों में एकाएक बदलाव के चलते एंप्लॉयीज का भविष्य खतरे में पड़ गया है।
क्या है Wipro का Project Readiness Program
फ्रेशर्स को जो मेल भेजा गया है, उसके मुताबिक टैंलेट ट्रांसफॉर्मेशन ने कैंपस और कैंपस के बाहर से हायर किए हुए एंप्लॉयीज के लिए यह कार्यक्रम तैयार किया है। इसका मकसद नए एंप्लॉयीज को जरूरी जानकारियों औऱ क्षमताओं से लैस करना है जिसकी मदद से वे ग्राहकों के प्रोजेक्ट्स पर काम के लिए तैयार हो सकेंगे। इस ट्रेनिंग के तहत पीआरपी एसेसमेंट होगा और इसमें हर गलत जवाब पर 0.25 अंक कटेंगे। सप्लीमेंट्री में भी अगर 60 फीसदी अंक पाने में सफल नहीं होते हैं तो एचआर इन्हें कंपनी से निकालने की प्रक्रिया शुरू कर देगा।