Crude Oil: US और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत की खबरों के बीच कमजोर ग्लोबल ट्रेंड को देखते हुए बुधवार को फ्यूचर ट्रेड में कच्चे तेल की कीमतें 4 फीसदी से ज़्यादा गिरकर 8,340 रुपये प्रति बैरल पर आ गई।

Crude Oil: US और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत की खबरों के बीच कमजोर ग्लोबल ट्रेंड को देखते हुए बुधवार को फ्यूचर ट्रेड में कच्चे तेल की कीमतें 4 फीसदी से ज़्यादा गिरकर 8,340 रुपये प्रति बैरल पर आ गई।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, अप्रैल डिलीवरी के लिए कच्चे तेल की कीमत 396 रुपये या 4.5 फीसदी गिरकर 8,340 रुपये प्रति बैरल पर आ गई। मई कॉन्ट्रैक्ट भी 305 रुपये या 3.58 फीसदी गिरकर 8,209 रुपये प्रति बैरल पर आ गया। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई।
दुनिया भर में, NYMEX पर मई कॉन्ट्रैक्ट के लिए वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स USD 3.21, या 3.48 प्रतिशत गिरकर USD 89.14 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि जून डिलीवरी के लिए ब्रेंट ऑयल न्यूयॉर्क में USD 4.65, या 4.64 प्रतिशत गिरकर USD 95.58 प्रति बैरल पर आ गया।
एनालिस्ट्स ने कहा कि वेस्ट एशिया में बदलते जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट के बाद ग्लोबल एनर्जी मार्केट में मंदी के माहौल के कारण कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव आया।
न्यूयॉर्क टाइम्स का दावा
न्यूयॉर्क टाइम्स ने दावा किया है कि US ने ईरान को 15-पॉइंट प्लान भेजा। प्लान ईरानी अधिकारियों तक कितना पहुंचा, साफ नहीं। इजरायल का समर्थन मिलेगा या नहीं, इस पर भी शंका है । US ने यूरेनियम एनरिचमेंट पर स्थायी रोक की शर्त रखी। मौजूदा न्यूक्लियर हथियारों को देश से बाहर करने की मांग की। बदले में अमेरिका सभी आर्थिक पाबंदियां हटाएगा। बुशेहर में सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम के लिए US मदद करेगा।
एक्सपर्ट्स की राय
HPCL के पूर्व सीएमडी एम.के. सुराना ने कहा कि यूएस-ईरान की जंग खत्म होने की उम्मीद से क्रूड में दबाव दिखा। बाजार भी शांति की मांग कर रहा है। युद्ध विराम न भी हो लेकिन शांति की बात जरुर हो रही है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाज निकल रहे है।
उन्होंने आगे कहा कि यूएस- ईरान के बीच में बात नहीं बनी तो दाम चढ़ेंगे। जब तक कुछ बड़ा नहीं होता भाव 120 डॉलर के पार नहीं जाएंगे। भारत में एलपीजी कंट्रोल कमोडिटी है। हालात थोड़े खराब है लेकिन काबू से बाहर नहीं हैं।
चॉइस ब्रोकिंग के कमोडिटी और करेंसी एनालिस्ट आमिर मकदा ने कहा, "बुधवार को क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट आई, क्योंकि मंदी का माहौल बन गया है।"उन्होंने आगे कहा कि यह ठंडापन ज़्यादातर जियोपॉलिटिकल माहौल में बदलाव की वजह से है।
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