समोसा-जलेबी पर सिगरेट की तरह नही लगेगा वॉर्निंग लेबल, हेल्थ मिनिस्ट्री ने दी ये बड़ी जानकारी

भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश भर के केंद्रीय संस्थानों को "तेल और शक्कर बोर्ड" लगाने का आदेश दिया है। इसका मललब ये है कि अब वेंडर्स को यह बताना होगा कि जो चीज वो परोस रहे हैं उसका हमारी सेहत पर कितना खराब असर पड़ सकताता है। या फिर उस चीज में कितनी चीनी या तेल है

अपडेटेड Jul 15, 2025 पर 6:24 PM
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फिलहाल हमारे शहरी इलाकों में हर पांचवां वयस्क मोटापे की समस्या से जूझ रहा है। बच्चों में मोटापा भी गलत खान-पान और कम शारीरिक गतिविधि की वजह से बढ़ रहा है

ज्यादा जलेबी और समोसा खाना भी आपकी सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने एडवाइजरी जारी करते हुए जलेबी और समोसा को संभल कर खाने की बात कही है।  स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि देश परमोटापे का खतरा मंडरा रहा है। 2050 तक 45 करोड़ लोग मोटापे का शिकार होंगे। इसके बाद भारत इस मामले में सिर्फ अमेरिका से पीछे रहेगा। समोसा और जलेबी सेहत को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।

दुकानों पर नहीं लगाने होंगे वार्निंग बोर्ड 

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि, उसके इस सलाह का उद्देश्य किसी खास स्नैक या स्ट्रीट फूड को निशाना बनाना नहीं है। इसमें विक्रेताओं द्वारा बेचे जाने वाले खाद्य उत्पादों पर किसी तरह का चेतावनी लेबल लगाने की बात नहीं की गई है, और न ही किसी विशेष भारतीय नाश्ते को लेकर कोई निर्देश दिया गया है। यह एक सामान्य जागरूकता पहल है, जो लोगों को यह समझाने के लिए बनाई गई है कि रोजमर्रा के खाने-पीने की चीज़ों में छुपे फैट और एक्स्ट्रा शुगर से स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ सकता है।


मंत्रालय ने दी ये बस सलाह

यह सलाह खासतौर पर वर्कप्लेस पर सेहतमंद विकल्प अपनाने और ज़्यादा तेल और चीनी को अपने खाने में कम करने की अपील करती है। मंत्रालय का उद्देश्य है कि लोग बेहतर लाइफस्टाइल अपनाए और खाने में बैलेंस बनाएं। यह भारत की समृद्ध स्ट्रीट फूड परंपरा को किसी भी तरह से दोषी नहीं ठहराती।

बता दें कि सोमवार को ऐसी खबर आई थी कि, भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश भर के केंद्रीय संस्थानों को "तेल और शक्कर बोर्ड" लगाने का आदेश दिया है। इसका मललब ये है कि अब वेंडर्स को यह बताना होगा कि जो चीज वो परोस रहे हैं उसका हमारी सेहत पर कितना खराब असर पड़ सकताता है। या फिर उस चीज में कितनी चीनी या तेल है। हांलाकि अब स्वास्थ्य मंत्रालय ने ऐसे किसी भी आदेश से इनकार किया है। उन्होंने जानकारी दी किस, दुकानदारों को किसी सोमेसे-जलेबी या किसी भी भारतीय नाश्ते पर वार्निंग लेबल लगाने की जरूरत नहीं है।

वर्तमान में हमारे शहरी इलाकों में हर पांचवां वयस्क मोटापे की समस्या से जूझ रहा है। बच्चों में मोटापा भी गलत खान-पान और कम शारीरिक गतिविधि की वजह से बढ़ रहा है। ये आंकड़े चिंतित करने वाले हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय का ये कदम सिर्फ मोटापे तक सीमित नहीं है। ये एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसका मकसद है डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज जैसी नॉन कम्युनिकेबल बीमारियों से समय रहते लोगों को बचाना।

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