आपकी सेहत को बिगाड़ सकते हैं एल्युमिनियम के बर्तन! अगर खाना बनाते हैं तो हो जाएं सावधान

यूएसएफडीए ने कहा, पीतल, एल्युमीनियम या पीतल बने कुछ बर्तन, जिन्हें इंडालियम या हिंडालियम के नाम से बेचा जाता है। इन बर्तनों में खाने बनाने पर सीसा घुल सकता है। इसी वजह से एजेंसी ने लोगों से ऐसे बर्तनों का इस्तेमाल तुरंत रोकने और दुकानदारों को इन्हें बेचने से मना किया है

अपडेटेड Aug 23, 2025 पर 5:03 PM
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ये बर्तन भोजन पकाने और स्टोर करने के लिए अनसेफ पाए गए हैं (Photo: Canva)

हमारे घर में खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाले बर्तन का काफी अहमियत होती है। खान जिस बर्तन में बनता है वो आपके सेहत और भोजन की गुणवत्ता पर सीधा असर डालते हैं। पुराने समय से लोग पानी और खाने के लिए मिट्टी, पीतल और चांदी के बर्तनों का इस्तेमाल करते थे। ऐसा माना जाता था कि ये न सिर्फ परंपरा का हिस्सा हैं बल्कि भोजन को और भी स्वास्थ्यवर्धक और लाभकारी बनाते हैं। आज के समय में कई तरह से बर्तन आते हैं। कुछ बर्तन शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व सुरक्षित रखते हैं, जबकि कुछ से हानिकारक रसायन मिल सकते हैं जो गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं।

हाल ही में अमेरिकी फूड रेगुलेटर अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (USFDA) ने भारतीय कंपनी सरस्वती स्ट्रिप्स प्राइवेट लिमिटेड के बर्तनों पर चेतावनी दी है, क्योंकि जांच में पाया गया कि इनमें से खतरनाक मात्रा में सीसा (लेड) भोजन में घुल सकता है। ये बर्तन बाजार में 'प्योर एल्युमिनियम यूटेंसिल्स' और 'टाइगर व्हाइट' के नाम से बेचे जा रहे हैं। ये बर्तन भोजन पकाने और स्टोर करने के लिए असुरक्षित पाए गए हैं।

ये है प्रोडक्‍ट


यूएसएफडीए इन बर्तनों के जारी किया खतरा

  • ब्रांड और उत्पाद का नाम: शुद्ध एल्युमीनियम बर्तन, टाइगर व्हाइट
  • ट्रेडमार्क संख्या: RTM 2608606
  • प्रमाणन दावा: ISO 9001:2015 प्रमाणित कंपनी
  • निर्माता: सरस्वती स्ट्रिप्स प्राइवेट लिमिटेड, भारत

यूएसएफडीए ने क्या कहा

यूएसएफडीए ने कहा, पीतल, एल्युमीनियम या पीतल बने कुछ बर्तन, जिन्हें इंडालियम या हिंडालियम के नाम से बेचा जाता है। इन बर्तनों में खाने बनाने पर सीसा घुल सकता है। इसी वजह से एजेंसी ने लोगों से ऐसे बर्तनों का इस्तेमाल तुरंत रोकने और दुकानदारों को इन्हें बेचने से मना किया है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एल्युमीनियम बर्तनों में सीसे की मात्रा कई बार 100 पीपीएम से ज्यादा पाई गई। जांच में यह भी सामने आया कि इनमें खाना पकाने या रखने पर सीसा सुरक्षित सीमा से कहीं अधिक निकल सकता है।

बच्चों पर होता है ये असर

बच्चों में सीसे का असर बेहद खतरनाक हो सकता है। इससे दिमागी विकास रुक सकता है, जिससे पढ़ाई में दिक्कत, बिहेवियर में बदलाव और आईक्यू लेवल में गिरावट देखी जा सकती है। जरा सा संपर्क भी नुकसानदेह साबित हो सकता है। एडल्ट में अगर लंबे समय तक सीसे का असर बना रहे तो दिल की बीमारियां, खून की कमी, किडनी खराब होना और ब्लड प्रेशर की समस्या होने का खतरा बढ़ जाता है। यूएसएफडीए के मुताबिक, सीसा ऐसा तत्व है जिसकी थोड़ी-सी भी मात्रा शरीर के लिए हानिकारक हो सकती है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।

शरीर में हो सकती है ये दिक्कतें

सीसे के शरीर में जाने से कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं। यह सिरदर्द, थकान, पेट दर्द, उल्टी और चक्कर जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। नसों पर बुरा असर डालने के साथ यह ध्यान और याददाश्त को भी कमजोर करता है। बच्चों के विकास में बाधा डालना, ब्लड प्रेशर बढ़ाना, किडनी को नुकसान पहुंचाना और खून की कमी जैसी परेशानियां भी इससे जुड़ी हैं। गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए तो यह खतरा और भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। यूएसएफडीए ने लोगों से अपील की है कि वे लिस्ट में बताए गए बर्तनों की पहचान करके उन्हें तुरंत नष्ट कर दें।

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