Chitra Ramkrishna केस में सरकार ने शुरू की जांच, 10 प्वाइंट्स में समझें अभी तक क्या हुआ

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने कहा, सरकार देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज में हुई अनियमितताओं पर गौर कर रही है

अपडेटेड Feb 22, 2022 पर 7:36 PM
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एनएसई की पूर्व सीईओ चित्रा रामकृष्ण के मामले में सीबीआई ने जांच तेज कर दी है

Former NSE CEO Chitra Ramkrishna case : सीबीआई (CBI) ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (National Stock Exchange) में कॉरपोरेट गवर्नैंस से जुड़ी अनियमितताओं के मामले जांच तेज कर दी है, वहीं ऐसी खबरें हैं कि इस मामले में हरकत में आते हुए सरकार ने भी जांच शुरू कर दी है। 10 प्वाइंट्स में समझें अभी तक क्या हुआ...

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने कहा कि सरकार देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज में हुई अनियमितताओं पर गौर कर रही है।

1. सीबीआई (CBI) ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़ी संदिग्ध खामियों की जांच के तहत देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज की पूर्व सीईओ चित्रा रामकृष्ण (Chitra Ramkrishna) और उनके एडवाइजर से पूछताछ की है। रॉयटर्स के मुताबिक, सीबीआई (CBI) अधिकारियों ने इस मामले से जुड़े डॉक्युमेंट जुटाने के लिए सेबी (SEBI) के दफ्तर का भी दौरा किया।


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2. हालिया कार्रवाई इस बात का संकेत है कि सीबीआई (CBI) 2018 के एनएसई के कुछ हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स को अल्गोरिदमिक ट्रेडिंग (algorithmic trading) की स्पीड बढ़ाने तक पहुंच उपलब्ध कराने के कथित आरोपों पर जांच तेज कर रही है। इसके अलावा स्क्रूटनी रिस्क के चलते एक बार से एनएसई (NSE) की लिस्टिंग की योजना में देरी हो रही है।

3. इससे पहले सीबीआई रामकृष्ण, नारायण और पूर्व सीओओ आनंद सुब्रमण्यन के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया था, जिससे वे देश न छोड़ सकें। साथ ही अपनी जांच को एनएसई के अल्गो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म तक तरजीही पहुंच देने के मामले तक बढ़ा दिया है।

4. सेबी के 11 फरवरी के उस आदेश के बाद सीबीआई की जांच में तेजी आई है, जिसमें एक्सचेंज में कॉरपोरेट गवर्नैंस से जुड़ी खामियों का उल्लेख किया गया था। इसमें कहा गया कि रामकृष्ण ने कई साल तक गोपनीय एनएसई डाटा एक बाहरी व्यक्ति के साथ शेयर किया और उनसे सलाह ली, जिसे उन्हें हिमालय का योगी बताया था। सेबी ने अपने आदेश में कहा कि पूर्व सीईओ ने “मनमानी” करते हुए सुब्रमण्यन को अपना एडवाइजर नियुक्त किया, जबकि उन्हें कोई संबंधित अनुभव नहीं था।

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5. एनएसई (NSE) ने कहा कि वह “वह गवर्नैंस और पारदर्शिता के उच्चतम स्टैंडर्ड्स का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है।” एक्सचेंज ने उसे लगभग 6-9 साल पुराना मामला बताया। रामकृष्ण ने जांच के दौरान सेबी (SEBI) को बताया कि उन्होंने एक्सचेंज की ईमानदारी से कोई समझौता नहीं किया।

6. रेगुलेटर का हालिया आदेश एनएसई (NSE) के लिए बड़ा झटका है, जो कई साल से आईपीओ (IPO) के लिए जूझ रही है। उस पर गवर्नैंस से जुड़ी खामियों और तकनीक समस्याओं के आरोप लग चुके हैं। हालांकि, एनएसई ने किसी गलत काम से इनकार किया है।

7. रेगुलेटर के आदेश में कहा गया कि रामकृष्ण महज किसी की “कठपुतली” के रूप में काम कर रही थीं, जिसे उन्होंने हिमालय का योगी बताया। रामकृष्ण ने 2016 में सीईओ का पद छोड़ दिया था।

8. कथित अल्गो स्कैम में कुछ ब्रोकर्स को एनएसई के अल्गो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म तक पहुंच उपलब्ध कराकर अनुचित फायदा पहुंचाया गया, जिससे उन्होंने फायदा हुआ या नुकसान से बचे। यह जांच अगस्त, 2017 में दिल्ली हाई कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका पर शुरू हुई थी।

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9. मई, 2019 में सीबीआई ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करके कहा कि उसकी जांच मूल शिकायत तक सीमित नहीं है। बीते साल जुलाई में सरकार ने कहा कि सीबीआई जांच अभी जारी है।

10. 1994 में एनएसई ट्रेडेड कॉन्ट्रैक्ट की संख्या के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव एक्सचेंज बन गया। रामकृष्ण 1990 की दशक की शुरुआत में एनएसई से जुड़ीं और एक्सचेंज की मौजूदा स्थिति का उन्हें खासा श्रेय जाता है।

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