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वित्त वर्ष 2022 में निजी खपत में आई उछाल लेकिन अभी भी वित्त वर्ष 2020 के लेवल से है पीछे

समग्र रुप से देखें तो इकोनॉमी में डिमांड की स्थिति कमजोर बनी हुई है जिसको देखते हुए आरबीआई अपनी नीतियों को ग्रोथ को पुश देने के लिए लंबे समय तक एकमोडेटिव बना रख सकता है.

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 08, 2022 पर 12:40 PM
वित्त वर्ष 2022 में निजी खपत में आई उछाल लेकिन अभी भी वित्त वर्ष 2020 के लेवल से है पीछे
लो बेस के कारण 2022 के एडवांस अनुमान की 2020 से तुलना करना ज्यादा बेहतर होगा। 2021 के लो बेस के कारण 2022 का अनुमान 2021 से तुलनीय नहीं है।

सरकार द्वारा कल जारी हुए पहले एडवांस इस्ट्यूमेंट के मुताबिक वित्त वर्ष 2022 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 9.2 फीसदी रह सकती है। हालांकि यह आरबीआई द्वारा पिछले महीने किए गए 9.5 फीसदी के अनुमान से 30 बेसिस प्वाइंट से कम है। हालांकि प्रतिशत के आधार पर यह पिछले 17 साल का हाइएस्ट ग्रोथ रेट है। इसकी वजह यह है कि पिछले साल का बेस रेट कोरोना महामारी के कारण काफी छोटा था।

खर्च के मोर्चे पर देखें तो  ग्रॉस फिक्सड कैपिटल फ़ॉर्मेशन के 2022 में सालाना आधार पर 15 फीसदी बढ़ने की उम्मीद है जो कि पिछले 10 साल का सबसे ऊंचा स्तर है। इस बड़े आंकड़ें में भी पिछले साल के लो बोस ने अपना असर दिखाया है।

सरकार के अंतिम खपत खर्च और निजी खपत खर्च की दर क्रमश: 7.6 फीसदी और 6.9 फीसदी पर रही है। 2021 में ग्रॉस फिक्सड कैपिटल फ़ॉर्मेशन और प्राइवेट फाइनल कंज्मशन एक्सपेंडिचर में क्रमश:  10.8 फीसदी और  9.1 फीसदी का संकुचन देखने को मिला था। वहीं गर्वमेंट फाइनल कंज्मशन एक्सपेंडिचर  में 2.9 फीसदी की बढ़त देखने को मिली।

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