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RBI की MPC में कैसे हुआ 0.40% रेपो रेट बढ़ाने का फैसला, कमेटी मेंबर जेआर वर्मा ने खोला राज

वर्मा का कहना है कि रेपो रेट 0.40 फीसदी बढ़ाने का फैसला खुद उनकी समझ में नहीं आया। उन्होंने कहा है कि उन्होंने बाकी सदस्यों की राय के खिलाफ नहीं जाने का फैसला किया

MoneyControl Newsअपडेटेड May 18, 2022 पर 6:46 PM
RBI की MPC में कैसे हुआ 0.40% रेपो रेट बढ़ाने का फैसला, कमेटी मेंबर जेआर वर्मा ने खोला राज
4 मई को RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने रेपो रेट को 40 बेसिस प्वॉइंट्स बढ़ाकर 4.4 फीसदी कर दिया था। उन्होंने कैश रिजर्व रेशियो में भी 50 बेसिस प्वॉइंट्स की वृद्धि कर दी थी।

RBI ने 4 मई को रेपो रेट अचानक 0.40 फीसदी बढ़ा दिया था। केंद्रीय बैंक के इस कदम पर लोगों ने हैरानी जताई थी। केंद्रीय बैंक ने मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की इमर्जेंसी बैठक बुलाई थी, जिसमें यह फैसला लिया गया। सवाल है कि आखिर कमेटी ने रेपो रेट 0.40 फीसदी ही बढ़ाने का फैसला क्यों किया? क्या एमपीसी के सभी छह सदस्य रेपो में इतनी ही वृद्धि को सही मान रहे थे? इन सवालों के जवाब एमपीसी के सदस्य जयंत आर वर्मा ने दिए।

वर्मा का कहना है कि रेपो रेट 0.40 फीसदी बढ़ाने का फैसला खुद उनकी समझ में नहीं आया। उन्होंने कहा है कि उन्होंने बाकी सदस्यों की राय के खिलाफ नहीं जाने का फैसला किया। दरअसल, आरबीआई की एमपीसी की बैठक के मिनट्स 18 मई को जारी किए गए हैं। उससे यह जानकारी मिली है।

वर्मा ने एमपीसी के मिनट्स के बारे में बताया, "MPC के ज्यादातर सदस्य क्यों 40 बेसिस प्वॉइंट्स की वृद्धि के पक्ष में थे, यह मुझे भी समझ में नहीं आया। 50 बेसिस प्वॉइंट्स से कम की वृद्धि के कुछ सांकेतिक या मनोवैज्ञानिक फायदे हो सकते हैं, जो 25 फीसदी की वृद्धि पर भारी पड़े होंगे।" उन्होंने कहा कि अब 10 बेसिस प्वाइंट की कमी करने के लिए पहले 10 बेसिस प्वॉइंट्स की वृद्धि करनी पड़ेगी।

4 मई को RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने रेपो रेट को 40 बेसिस प्वॉइंट्स बढ़ाकर 4.4 फीसदी कर दिया था। उन्होंने कैश रिजर्व रेशियो में भी 50 बेसिस प्वॉइंट्स की वृद्धि कर दी थी। दोनों कदमों का मकसद तेजी से बढ़ती महंगाई को काबू में करना था।

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