दिल्ली जल बोर्ड भ्रष्टाचार मामले में ED ने कसा शिकंजा, दिल्ली और गुरुग्राम सहित देशभर में की छापेमारी

ED Searches: दिल्ली जल बोर्ड के पांच सालों के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फ्लो मीटर की आपूर्ति, स्थापना, परीक्षण और कमीशनिंग (SITC) और संबंधित ओ एंड एम संचालन के लिए दिसंबर 2017 में एक टेंडर NIT 22 जारी की गई थी। आरोपी और एनकेजी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने NBCC द्वारा जारी झूठे प्रमाणपत्रों और मनगढ़ंत कागजात की मदद से 38,02,33,080 रुपये का टेंडर हासिल किया था

अपडेटेड Jul 25, 2023 पर 2:13 PM
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ED Searches: सूत्रों ने बताया कि जांच के सिलसिले में सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में लगभग 10 परिसरों पर तलाशी ली गई

रिपोर्ट- शंकर आनंद 

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली जल बोर्ड (DJB) में कथित अनियमितताओं और धन की हेराफेरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी सहित कई अन्य ठिकानों पर छापेमारी की। सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि ED ने दिल्ली जल बोर्ड में भ्रष्टाचार से संबंधित दो PMLA मामलों के सिलसिले में 20 से अधिक स्थानों पर देशव्यापी छापेमारी की। ये छापेमारी दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, केरल और चेन्नई में हुई। जांच एजेंसी ने भ्रष्टाचार के दो मामलों को टेकओवर करने के बाद बड़ी सर्च ऑपरेशन को अंजाम दिया है। छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी ने काफी महत्वपूर्ण सबूतों और दस्तावेजों को बरामद किया है।

पिछले साल केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली जल बोर्ड में भ्रष्टाचार के सिलसिले में मामला दर्ज किया था। ED का पहला मामला CBI की FIR पर आधारित था। इस साल दूसरा PMLA ECIR दर्ज किया गया, वह भी दिल्ली जल बोर्ड मामले के संबंध में।


CBI ने तत्कालीन मुख्य अभियंता जगदीश कुमार अरोड़ा, पी.के. गुप्ता, तत्कालीन SE-दो, सुशील कुमार गोयल, तत्कालीन कार्यकारी अभियंता (ई एंड एम), दिल्ली, अशोक शर्मा, तत्कालीन एई (ईएंडएम), रंजीत कुमार, तत्कालीन एएओ, दिल्ली जल बोर्ड और और डी.के. मित्तल, तत्कालीन महाप्रबंधक, एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड, इसके परियोजना कार्यकारी साधन कुमार और एक निजी फर्म एनकेजी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के खिलाफ केस दर्ज किया था।

क्या है आरोप?

सूत्रों ने बताया कि जांच के सिलसिले में सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में लगभग 10 परिसरों पर तलाशी ली गई। सूत्रों के मुताबिक, छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी ने कुछ दस्तावेज और रिकॉर्ड जब्त किए हैं। बताया जा रहा है कि ED की जांच DJB से 20 करोड़ रुपये के कथित गबन मामले में दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार रोधी शाखा (ACB) द्वारा नवंबर 2022 में दर्ज FIR पर आधारित है। CBI के अनुसार, आरोपियों ने एनकेजी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को अनुचित लाभ पहुंचाने की साजिश रची और इसे तकनीकी रूप से योग्य बना दिया।

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दिल्ली जल बोर्ड के पांच सालों के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फ्लो मीटर की आपूर्ति, स्थापना, परीक्षण और कमीशनिंग (SITC) और संबंधित ओ एंड एम संचालन के लिए दिसंबर 2017 में एक टेंडर NIT 22 जारी की गई थी। आरोपी और एनकेजी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने NBCC द्वारा जारी झूठे प्रमाणपत्रों और मनगढ़ंत कागजात की मदद से 38,02,33,080 रुपये का टेंडर हासिल किया। आने वाले दिनों में ईडी आरोपियों को जांच में शामिल होने के लिए समन भेज सकती है।

CBI ने दर्ज किया था मामला

पिछले साल केंद्रीय जांच एजेंसी CBI द्वारा एक भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया था। करीब 38 करोड़ रुपये के टेंडर सिस्टम से जुड़े मामले में भ्रष्टाचार के मामले को दर्ज किया गया था। उसी को आधार बनाते हुए ED ने मामले में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत आगे की तफ्तीश को बढ़ाते हुए छापेमारी की है। इस मामले की तफ्तीश के दौरान ये पाया गया कि एक साजिश के तहत करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया था।

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