सितंबर के पहले सप्ताह में बुधवार की सुबह 10वीं के स्टूडेंट आरव ने एक नेशनल न्यूजपेपर के फ्रंट पेज पर एक कोचिंग इंस्टीट्यूट का विज्ञापन देखा। कोचिंग इंस्टीट्यूट ने ऐड में दावा किया था कि मेडिकल एंट्रेस एक्जाम नीट (NEET) की ऑल इंडिया टॉपर तनीषा मेहता (नाम बदल दिया गया है) उसकी स्टूडेंट थीं। आरव हैरान रह गया।
एक दिन पहले उसके कोचिंग इंस्टीट्यूट ने उसी टॉपर को गर्व से अपना स्टूडेंट्स बताकर प्रचारित किया था। उत्सुकतावश, उसने गूगल पर तनीषा का नाम सर्च किया। उन्होंने पाया कि कम से कम तीन इंस्टीट्यूट तनीषा के अपनी स्टूडेंट होने का दावा किया था।
टॉपर को लगभग सभी ने पढ़ाया
नीट की तैयारी में लगा आरव कोई चांस नहीं लेना चाहता था। उसने अपने पिता से एक अन्य ट्यूशन सेंटल में नामांकन कराने के लिए कहा। उसे लगा कि बेहतर नतीजों के लिए एक से ज्यादा कोचिंग इंस्टीट्यूट से जुड़ना सही है। उसके पिता भी हैरान रह गए और अपनी रिसर्च में पाया कि तनीषा को अलग-अलग तरीकों से हर इंस्टीट्यूट ने पढ़ाया था।
स्टूडेंट्स के साथ होता है एक तरह का समझौता
एक कोचिंग सेंटर ने उन्हें बताया कि तनीषा ने उनके यहां से एक टेस्ट सीरीज की थी और इस तरह वह उनकी स्टूडेंड हुई। एक अन्य कोचिंग इंस्टीट्यूट ने कहा, तनीषा ने उनके यहां से कंटेंट लिया था, इसलिए वह उनकी स्टूडेंट हुई। कुछ ऐसी ही वजह दूसरे इंस्टीट्यूट में बताई गई।
शुरुआत में आरव और उनके पिता ने पाया कि स्टूडेंट्स और कोचिंग सेंटर्स के बीच एक सीधा समझौता जैसा था। लेकिन यहां पर अभी काफी कुछ देखना बाकी था।
पेरेंट्स और स्टूडेंट्स को मिलते हैं कई ऑफर
एक एजुकेटर ने कहा, “जब एडमिशन के समय एजुकेटर्स से पैरेंट्स और स्टूडेंट्स से बातचीत के लिए कहा जाता है तो वे उन्हें कई ऑफर देते हैं। वे स्टूडेंट्स और पेरेंट्स को सुहाने सपने दिखाते हैं। हर कोई इन ऑफर्स पर अपनी सहमति देता है।”
एक अन्य एजुकेटर ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा, आईआईटी और मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन लेने के इच्छुक ज्यादातर स्टूडेंट्स टियर 2 शहरों और छोटे कस्बों से होते हैं। साथ ही उन्हें कॉम्पीटिटिव वर्ल्ड की कम जानकारी होती है। 2018 में लगभग 52,400 कैंडीडेट्स पटना में हुए टेस्ट्स में बैठे थे, जो दिल्ली के बाद दूसरी बड़ा आंकड़ा था। वहीं कोटा चौथे स्थान पर था।
अच्छे स्टूडेंट्स को लुभाने के लिए अपनाई जाती हैं कई स्ट्रैटजी
उन्होंने महामारी से ठीक पहले यानी लगभग दो साल पहले का एक अनुभव साझा किया। दरअसल, जबलपुर की एक स्टूडेंट ने कोटा के जानेमाने एजुकेशन सेंटर में खुद को एनरोल कराया। वह सेंटर की ‘क्लासरूम स्टूडेंट’ थी। क्लास शुरू होने से पहले वह किताबें खरीदने के लिए कोटा में अपने हॉस्टल से बाहर निकली। बाहर एक अन्य कोचिंग इंस्टीट्यूट का एक काउंसलर टकरा गया, जिसने उसे अपना कंटेंट दिया। कुछ पुराने टॉपर्स के उदाहरण दिए, जिन्होंने उसके कंटेंट का इस्तेमाल किया था। दरअसल, वह 10वीं में 94 फीसदी नंबर के साथ स्कूल टॉपर थी। इस प्रकार कोचिंग सेंटर जानते हैं कि उन्हें किसे टारगेट करना है और कैसे करना है। आखिरकार उसे नीट में खासी अच्छी रैंक मिली और दोनों ही क्लासेज उसका प्रचार करने लगीं।