Mili Review: जाह्नवी कपूर (Janhvi Kapoor), सनी कौशल (Sunny Kaushal) और मनोज पाहवा (Manoj Pahwa) की फिल्म 'मिली (Mili)' सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। मिली की कहानी काफी दिलचस्प बताई जा रही है। मथुकुट्टी जेवियर (Mathukutty Xavier) द्वारा निर्देशित और बोनी कपूर (Boney Kapoor) द्वारा निर्मित इस फिल्म की एक बहुत ही सरल कहानी है। मिली (जान्हवी कपूर) नाम की एक लड़की एक फूड आउटलेट के फ्रीजर के अंदर बंद हो जाती है, जहां वह काम करती है। इस दौरान वह जिंदगी और मौत के बीच फंसी हुई हैं। वह जिंदा रहने के लिए संघर्ष कर रही है। 'मिली' मलयालम फिल्म हेलेन (Helen) की आधिकारिक रीमेक है।
फिल्म में मिली (जाह्नवी कपूर) की उस कहानी को दिखाया गया है, जो देहरादून में बीएससी नर्सिंग कोर्स करने के बाद जॉब के लिए कनाडा जाने की तैयारी कर रही है। साथ में वह एक रेस्टोरेंट में पार्ट टाइम जॉब भी कर रही है। मिली के के पिता निरंजन (मनोज पाहवा) एक इंश्योरेंस एजेंट हैं। वह नहीं चाहते कि उनकी बेटी कनाडा जाए। उन्हें मिली का ब्वॉयफ्रेंड समीर (सनी कौशल) भी पसंद नहीं आता। मिली चाहती है कि उसका बॉयफ्रेंड समीर किसी जॉब में सेटल हो जाए, जिससे आगे चलकर शादी में कोई दिक्कत नहीं हो।
इन सभी प्लानिंग के बीच लाइफ को बैलेंस कर रही मिली की जिंदगी एक नया मोड़ लेती है, जब वो ड्रिंक एंड ड्राइव केस में फंस जाती है। अचानक एक रात को रेस्टोरेंट से निकलते वक्त उसका मैनेजर गलती से उस फ्रीजर रूम को बंद करके चला जाता है, जिसमें किसी काम से मिली गई थी। उसके बाद के रोमांचकारी पांच घंटों की कहानी है मिली। बाहर क्या हो रहा है और अंदर कैसे वो ठंड से जूझते हुए माइनस 17 डिग्री से बाहर निकलने के लिए जंग लड़ती है, यही दिखाया है इस फिल्म में...
फिल्म की कमियां और खूबियां
फिल्म की स्टोरी भले ही बहुत ही सरल है, लेकिन इसकी स्क्रिप्ट में कई खामियां हैं। सबसे पहले, जब मिली फ्रीजर में फंस जाती है, तो उसका फोन बज रहा होता है। उसके पिता (मनोज पाहवा) उसे लगातार फोन कर रहे हैं, लेकिन वह कोई जवाब नहीं देती है। इसके बाद पिता अपनी बेटी की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराता है। हालांकि, किसी ने भी उसके मोबाइल फोन को ट्रैक करने के बारे में सोचा भी नहीं।
फिल्म की कहानी थोड़ी खिंची हुई लग रही है। ट्रेलर देखने वाला व्यक्ति जब सिनेमा हॉल में एंट्री करेगा, तो उसे मिली के फ्रीजर में फंसने का इंतजार करना पड़ेगा, क्योंकि उससे पहले फिल्म में कुछ खास नहीं है। जान्हवी कपूर जो करती हैं उसमें अच्छी लगती हैं, लेकिन कुछ भी असाधारण लाने में विफल रहती हैं। यहां तक कि जब वह एक फ्रीजर में फंस गई है और जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रही है, तो ऐसा कोई दृश्य नहीं है जो आपके रोंगटे खड़े कर दे।
मनोज पाहवा हर दूसरी फिल्म या शो में होते हैं। सनी कौशल को और स्क्रीन टाइम भी देना चाहिए था। कुल मिलाकर, मिली एक बेहतर फिल्म हो सकती थी अगर लेखक स्क्रिप्ट पर थोड़ी मेहनत करते। आप इसे सिनेमाघरों में जाकर देख सकते हैं, लेकिन यह अपनी छाप छोड़ने में शायद ही सफल हो।