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जस्टिस संजीव खन्ना बने 51वें चीफ जस्टिस, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिलाई पद की शपथ

51st Chief Justice of India: जस्टिस संजीव खन्ना देश के 51वें मुख्य न्यायाधीश बन गए हैं। उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुबह 10 बजे राष्ट्रपति भवन में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। जस्टिस संजीव खन्ना जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की जगह ले रहे हैं। जस्टिस खन्ना का कार्यकाल 13 मई, 2025 तक रहेगा। वो सिर्फ 6 महीने तक इस पद पर रहेंगे

MoneyControl Newsअपडेटेड Nov 11, 2024 पर 10:49 AM
जस्टिस संजीव खन्ना बने 51वें चीफ जस्टिस, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिलाई पद की शपथ
51st Chief Justice of India: सुप्रीम कोर्ट जज के तौर पर जस्टिस खन्ना ने 65 फैसले लिखे हैं। इस दौरान वे करीब 275 बेंचों का हिस्सा रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के सीनियर जज संजीव खन्ना आज (11 नवंबर 2024) नए चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ ग्रहण कर ली है। वो भारत के 51वें मुख्य न्यायाधीश बन गए हैं। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुबह 10 बजे संजीव खन्ना को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। नए जज का कार्यकाल 13 मई 2025 को खत्म होगा। वो सिर्फ 6 महीने तक इस पद पर रहेंगे। जस्टिस खन्ना के नाम की सिफारिश जस्टिस चंद्रचूड़ ने की थी। चंद्रचूड़ 10 नवंबर को 65 साल की उम्र में इस पद से रिटायर हुए। जस्टिस खन्ना का जन्म  14 मई 1960 को हुआ था।

जस्टिस संजीव खन्ना ने दिल्ली के मॉडर्न स्कूल और सेंट स्टीफंस कॉलेज से पढ़ाई की है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से लॉ की डिग्री हासिल की। इसके बाद 1983 में उन्होंने दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट से वकालत की प्रैक्टिस शुरू कर दी। वह साल 2005 में दिल्ली हाई कोर्ट के जज बने। जनवरी 2019 में वह सुप्रीम कोर्ट के जज नियुक्त हुए। उन्हें आपराधिक, सिविल, टैक्स और संवैधानिक कानूनों का बड़ा जानकार माना जाता है।

जस्टिस देव राज खन्ना के बेटे हैं जस्टिस संजीव खन्ना

जस्टिस खन्ना दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस देव राज खन्ना के बेटे हैं। उनके चाचा हंसराज खन्ना सुप्रीम कोर्ट के जज रह चुके हैं। हालांकि इंदिरा सरकार के इमरजेंसी का विरोध करने पर हंसराज को सीनियर होने के बावजूद चीफ जस्टिस नहीं बनाया गया। उनकी जगह जस्टिस एमएच बेग को CJI बना दिया गया। जस्टिस हंसराज ने इसका विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट जज से इस्तीफा दे दिया था। जस्टिस संजीव खन्ना सुप्रीम कोर्ट जज के तौर पर 65 फैसले लिखे हैं। इस दौरान वे करीब 275 बेंचों का हिस्सा रहे हैं। हाई कोर्ट के जज के रूप में नियुक्त होने से पहले तीसरी पीढ़ी के वकील थे।

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