लोकसभा चुनाव 2024 में डाले गए वोटों और गिने गए वोटों में है लगभग 6 लाख का अंतर, ADR ने चुनाव आयोग से पूछी वजह

ADR ने आयोग से यह अनुरोध भी किया है कि वह ADR के निष्कर्षों को देखते हुए उठाए गए किसी भी कदम या कार्रवाई के बारे में उसे सूचित करे। साल 2019 में भी इस मुद्दे को उठाया गया था, जब ADR और ‘कॉमन कॉज’ ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। ADR ने कहा कि दिसंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई

अपडेटेड Aug 04, 2024 पर 2:18 PM
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आम चुनाव 2024 के परिणामों में 538 संसदीय क्षेत्रों में डाले गए और गिने गए मतों में काफी अंतर सामने आया।

चुनावी सुधार के लिए कार्यरत निकाय ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (ADR) ने दावा किया है कि लोकसभा चुनाव 2024 में 538 निर्वाचन क्षेत्रों में डाले गए मतों और गिने गए मतों की संख्या में अंतर है। इसे लेकर ADR ने निर्वाचन आयोग को लेटर लिखकर इस अंतर का कारण बताने की मांग की है। ADR की रिपोर्ट में कहा गया है कि आम चुनाव 2024 के परिणामों में 538 संसदीय क्षेत्रों में डाले गए और गिने गए मतों में काफी अंतर सामने आया। अमरेली, अत्तिंगल, लक्षद्वीप और दादरा नगर हवेली एवं दमन दीव सीट पर हुए मतदान में कोई अंतर नहीं है। सूरत संसदीय सीट पर कोई मुकाबला नहीं था। इसलिए 538 संसदीय सीट पर कुल 5,89,691 मतों की विसंगति यानि अंतर है।

ADR के विश्लेषण के अनुसार, हाल के लोकसभा चुनाव में 362 संसदीय क्षेत्रों में डाले गए मतों की तुलना में कुल 5,54,598 वोट कम गिने गए, जबकि 176 संसदीय क्षेत्रों में डाले गए वोटों की तुलना में कुल 35,093 मत अधिक गिने गए। हालांकि, ADR ने यह स्पष्ट नहीं किया कि मतों में इस अंतर की वजह से कितनी सीटों पर अलग परिणाम सामने आते।

चुनाव परिणामों की सत्यता पर खड़े हो रहे सवाल


हाल ही में विश्लेषण के निष्कर्षों को जारी करते वक्त ADR के फाउंडर जगदीप छोकर ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि अंतिम मतदान प्रतिशत डेटा जारी करने में अत्याधिक देरी, निर्वाचन क्षेत्र वार और मतदान केंद्र वार आंकड़े उपलब्ध न होने और क्या नतीजे अंतिम मिलान आंकड़ों के आधार पर घोषित किए गए थे, इसे लेकर अस्पष्टता ने चुनाव परिणामों की सत्यता के बारे में चिंता और सार्वजनिक संदेह पैदा कर दिया है।

ADR की रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग मतगणना पर अंतिम और प्रामाणिक डेटा जारी करने से पहले चुनाव परिणाम घोषित करने, ईवीएम में डाले गए मतों और गिने गए मतों में अंतर, मत प्रतिशत में वृद्धि, डाले गए मतों के आंकड़े संख्या में न देने, डाले गए मतों के आंकड़े को जारी करने में अनुचित देरी और अपनी वेबसाइट से कुछ डेटा को हटाने का कोई उचित स्पष्टीकरण देने में अब तक विफल रहा है।

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ऐप पर सातवें चरण के मतदान में केवल प्रतिशत में थे आंकड़े

इस साल अप्रैल-मई में हुए सत्रहवें आम चुनाव के दौरान, चुनाव के पहले छह चरणों के लिए ‘वोटर टर्नआउट ऐप’ पर मतदाताओं की सही संख्या प्रदर्शित की गई थी। हालांकि अंतिम चरण यानी सातवें चरण के मतदान में केवल प्रतिशत में आंकड़े दिए गए थे और निर्वाचन आयोग द्वारा पिछले डेटा को हटा दिया गया था। विशेषज्ञों और ADR की एक टीम द्वारा किए गए शोध के अनुसार, विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या और गिने गए मतों की संख्या के बीच गंभीर अंतर पाया गया।

'हर वोट महत्वपूर्ण है और इसे गिना जाना चाहिए'

ADR ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार और निर्वाचन आयुक्तों ज्ञानेश कुमार और डॉ सुखबीर सिंह संधू को लेटर लिखकर 2024 के आम चुनाव के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में दर्ज किए गए मतों में कथित अंतर पर गंभीर चिंता जताई। लेटर में मांग की गई है कि आयोग, डाले गए मतों पर गिने गए मतों की संख्या में अंतर को दूर करने और चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कार्रवाई करे। लेटर में कहा गया है, “हर वोट महत्वपूर्ण है और इसे गिना जाना चाहिए।” आयोग से इस अंतर के कारणों को स्पष्ट करने का आग्रह भी किया गया है। ADR ने आयोग से यह अनुरोध भी किया है कि वह ADR के निष्कर्षों को देखते हुए उठाए गए किसी भी कदम या कार्रवाई के बारे में उसे सूचित करे।

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साल 2019 में भी उठाया गया था मुद्दा

साल 2019 में भी इस मुद्दे को उठाया गया था, जब ADR और ‘कॉमन कॉज’ ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। उन्होंने निर्वाचन आयोग को यह निर्देश देने की मांग की थी कि वह गहन मिलान से पहले प्रोविजनल आंकड़ों के आधार पर परिणामों की घोषणा करना बंद कर दे। याचिका में 2019 के लोकसभा चुनाव का हवाला दिया गया था, जहां अनुमानित आंकड़ों के आधार पर परिणाम घोषित किए गए थे। ADR ने कहा कि दिसंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

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