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'चुनाव प्रचार करना मौलिक अधिकार नहीं', ED ने अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत का किया विरोध

Lok Sabha Elections 2024: ED ने दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल कर कहा है कि चुनावों के प्रचार करना कोई बुनियादी या संवैधानिक अधिकार नहीं है। अगर ऐसा हुआ तो कंपनी डायरेक्टरों को मीटिंग के लिए जमानत दी जा सकती है

Akhileshअपडेटेड May 09, 2024 पर 6:15 PM
'चुनाव प्रचार करना मौलिक अधिकार नहीं', ED ने अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत का किया विरोध
Arvind Kejriwal arrested News: ED ने केजरीवाल को 21 मार्च को गिरफ्तार कर लिया था। वह इस समय तिहाड़ जेल में हैं

Lok Sabha Elections 2024: सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार (10 मई) को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को मौजूदा लोकसभा चुनावों में प्रचार करने की अनुमति देने के लिए अंतरिम जमानत पर फैसला करने वाला है। हालांकि, इससे एक दिन पहले ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने AAP प्रमुख की अंतरिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए शीर्ष अदालत में एक हलफनामा दायर कर दिया है। केंद्रीय एजेंसी कहा है कि कानून सभी के लिए समान हैं। ED ने कहा कि चुनाव में प्रचार करने का अधिकार न तो मौलिक अधिकार है और न ही संवैधानिक।

ED ने कहा है कि अगर ऐसा हुआ तो किसानों को अपनी फसलों के लिए और कंपनी डायरेक्टर को मीटिंग के लिए जमानत दी जा सकती है। एजेंसी ने कहा है कि पिछले पांच सालों में करीब 123 चुनाव हुए है। अगर इस तरह से चुनावों के लिए अंतरिम जमानत दी जाती रही तो किसी नेता को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, क्योंकि चुनाव लगातार चलते रहने वाली प्रकिया है।

जमानत से जाएगा गलत संदेश

प्रवर्तन निदेशालय के हलफनामे में कहा गया है कि अगर नेताओं को चुनावों के लिए अंतरिम जमानत दी जाती है तो इसका गलत संदेश जाएगा जो एक तरह से देश में समाज को दो भागों में बंटा माना जाएगा। शीर्ष अदालत में दाखिल एक नए हलफनामे में ED ने कहा कि किसी भी नेता को चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत नहीं दी गई है, भले ही वह चुनाव नहीं लड़ रहा हो।

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