MVA Political Crisis: शरद पवार ने महीनों पहले ही दी थी उद्धव ठाकरे को शिवसेना के भीतर विद्रोह की चेतावनी
MVA Political Crisis: शरद पवार ने उद्धव ठाकरे को कम से कम चार से पांच महीने पहले चेतावनी दी थी। उन्हें अपनी पार्टी के नेताओं और MVA के दूसरे मंत्रियों से मिलना शुरू करने की सलाह दी थी
शरद पवार ने महीनों पहले ही दी थी उद्धव ठाकरे को शिवसेना का अंदर विद्रोह की चेतावनी
MVA Political Crisis: महाराष्ट्र (Maharashtra) में शिवसेना (Shiv Sena) मंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के कारण पैदा हुए राजनीतिक संकट (Political Crisis) के महीनों पहले, NCP प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) ने उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) को शिवसेना और सत्तारूढ़ MVA के नेताओं के भीतर "बढ़ती चिंता" के बारे में चेतावनी दी थी। The Indian Express ने एक उच्च स्तरीय सूत्र के हवाले से कहा कि यहां तक शरद पवार ने उन्हें एक "संभावित विद्रोह" की ओर भी इशारा किया था।
सूत्र ने कहा, "शरद पवार ने उद्धव ठाकरे को कम से कम चार से पांच महीने पहले चेतावनी दी थी। उन्हें अपनी पार्टी के नेताओं और MVA के दूसरे मंत्रियों से मिलना शुरू करने की सलाह दी थी।"
सूत्र के अनुसार, पवार ने मुख्यमंत्री ठाकरे की "दुर्गमता" को लेकर MVA नेताओं के बीच बढ़ती असहमति को भांप लिया था। सूत्र ने कहा, "उन्होंने ठाकरे को संभावित विद्रोह की चेतावनी भी दी थी, लेकिन उद्धव ने इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया।"
'पवार को भी ठाकरे से मिलने का समय नहीं मिला था'
सूत्र ने कहा, इतना ही नहीं कुछ मौकों पर यहां तक कि पवार को भी ठाकरे से मिलने का समय नहीं मिला था। सूत्र ने कहा, "पवार सीएम की गैर-मौजूदगी से परेशान थे। वे गठबंधन की सभी पार्टियों के नेताओं से मिलने के लिए समय नहीं निकाल रहे थे।"
एक और सूत्र ने कहा कि उद्धव "नियमित रूप से बातचीत नहीं कर रहे थे। पवार ने उद्धव को शिवसेना, गठबंधन के भीतर बढ़ती चिंता के बारे में चेतावनी दी थी।"
एक और सूत्र ने कहा, "MVA के कुछ विधायकों ने भी पवार से कहा था कि सीएम ने उनकी बात नहीं सुनी और उद्धव से बात करना मुश्किल था। वे सरकार में अलग-थलग और अवांछित महसूस करते थे।"
कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि पार्टी के विधायकों और मंत्रियों ने दिल्ली में अपने आलाकमान के साथ कम से कम दो बार इस मुद्दे को उठाया था।
नेता ने कहा, "कई बार, हमारे कैबिनेट मंत्रियों को कुछ प्रोजेक्ट या नीतियों पर सीएम के हस्तक्षेप की जरूरत होती है। मगर CMO से अपॉइंटमेंट लेना लगभग असंभव था।"
ठाकरे के नेतृत्व का एक और पहलू है, जिसने कांग्रेस को "नाराज" किया। वो ये कि अहम फैसलों पर विचार-विमार्श के लिए मुख्यमंत्री का मौजूद नहीं रहना।
ये शिकायत सिर्फ शिवसेना, कांग्रेस या NCP की ही नहीं, MVA के साथ गठबंधन करने वाले छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी इसी तरह की चिंता जताई है।
एक विधायक, जिसकी पार्टी MVA का समर्थन कर रही है। उन्होंने कहा, "मैंने CMO को 45 कॉल किए थे। लेकिन कोई जवाब नहीं आया।"
विधायक के अनुसार, छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों को हल्के में लेने के "इस रवैये" के कारण, परिषद और राज्यसभा चुनावों के दौरान शिवसेना से गुस्सा होकर कई लोगों ने खुद को दूर कर लिया।
हालांकि, शिवसेना के एक पदाधिकारी ने कहा कि उन्हें विधायकों के बीच इस तरह की किसी नाराजगी की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि ठाकरे लगातार बैठकें कर रहे थे और विधायकों और मंत्रियों से लगातार बातचीत कर रहे थे।
अधिकारी ने कहा, "Covid-19 और खराब स्वास्थ्य के बावजूद, सीएम हर समय सक्रिय रहते थे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लोगों से मिलते थे।"