UCC in Gujarat: उत्तराखंड के बाद अब एक और भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित राज्य में समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, गुजरात सरकार समान नागरिक संहिता को लागू करने को लेकर मंगलवार (4 फरवरी) को घोषणा कर सकती है। सूत्रों ने बताया कि गुजरात सरकार मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से यूसीसी समिति के बारे में घोषणा कर सकती है। इस समिति में तीन से पांच लोग हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व वाली गुजरात सरकार आज यानी मंगलवार (4 फरवरी) को राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के कार्यान्वयन की खोज के लिए एक समिति की घोषणा करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
न्यूज 18 के मुताबिक, समिति का नेतृत्व हाई कोर्ट के रिटायर जज द्वारा किए जाने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक, समिति के गठन के बाद कल कैबिनेट द्वारा इसकी मंजूरी दी जाएगी। इसके बाद गुजरात सरकार राज्य विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक लाएगी। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूसीसी को लेकर ऐलान करेंगे।
गुजरात में वर्तमान में बीजेपी की सरकार है। इसे बीजेपी का गढ़ भी माना जाता है। पिछले 30 सालों से यहां की सत्ता पर भगवा पार्टी काबिज है। गुजरात में 2022 विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने यूसीसी को लेकर अपने इरादों को जाहिर किया था।
उत्तराखंड में 27 जनवरी को राज्य में यूसीसी लागू किया गया था। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यूसीसी (समान नागरिक संहिता) पोर्टल और नियम को लॉन्च किया। उन्होंने बताया था कि उत्तराखंड में यूसीसी लागू करके हम संविधान निर्माता बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। उत्तराखंड सरकार ने यूसीसी के लिए काफी बातों पर विचार-विमर्श किया। यूसीसी में अनुसूचित जनजातियों को छूट दी गई है।
गुजरात सरकार का यह कदम उत्तराखंड द्वारा समान नागरिक संहिता लागू किए जाने के बाद आया है। इसमें सभी नागरिकों के लिए समान विवाह, तलाक, संपत्ति, विरासत और गोद लेने के कानूनों की रूपरेखा तैयार की गई है। उत्तराखंड गोवा के बाद नागरिकों के लिए समान कानूनी ढांचा बनाने वाला दूसरा राज्य बन गया है।
राज्य विधानसभा में विधेयक पारित होने के लगभग एक साल बाद उत्तराखंड में यूसीसी लागू हुआ। राज्य में यूसीसी के प्रावधानों में 21 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के लिए माता-पिता की सहमति और रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है।
इसके अनुसार, यूसीसी उत्तराखंड और उससे बाहर रहने वाले राज्यों के निवासियों पर लागू होगा। हालांकि, अनुसूचित जनजातियों को छूट दी गई है। इसमें विवाह पंजीकरण को लेकर भी नियम बनाया गया है। 26 मार्च 2010 से यूसीसी लागू होने की तारीख के बीच हुए विवाह का रजिस्ट्रेशन अगले छह महीने में करवाना होगा। साथ ही यूसीसी के लागू होने के बाद विवाह का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए 60 दिन का समय मिलेगा।
उत्तराखंड की भाजपा सरकार ने भले ही आजाद भारत में पहली समान नागरिक संहिता लागू कर दी हो, लेकिन कानूनी विशेषज्ञ इस बात को लेकर संशय में हैं कि क्या यह पर्वतीय राज्य के रूढ़िवादी समाज में जमीन पर सफल होगी जहां अब भी सदियों पुराने पारंपरिक मूल्यों का पालन किया जाता है।
विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों को नियंत्रित करने वाले कानूनों में एकरूपता लाने का यूसीसी का मूल उद्देश्य बहुत अच्छा और संविधान की भावना के अनुरूप है लेकिन उन्हें उत्तराखंड जैसे पारंपरिक समाज में इसकी स्वीकार्यता को लेकर संदेह है।