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UP Election 2022: मथुरा-वृंदावन की क्या है ग्राउंड रिपोर्ट, क्या रिपोर्ट कार्ड से जीत रहे हैं ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा?

यूपी में पहले चरण में जिन सीटों पर सबकी नजर है, उनमें सबसे प्रमुख सीट के तौर पर मथुरा-वृंदावन को देखा जा रहा है। मथुरा से बीजेपी प्रत्याशी और उर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा अपने 'रिपोर्ट कार्ड' के दम पर फिर भारी मतों से जीत का दावा कर रहे हैं। क्या है इस इलाके का चुनावी रुख, जानिए हमारी इस ग्राउंड रिपोर्ट में-

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 05, 2022 पर 3:01 PM
UP Election 2022: मथुरा-वृंदावन की क्या है ग्राउंड रिपोर्ट, क्या रिपोर्ट कार्ड से जीत रहे हैं ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा?
मथुरा विधानसभा सीट से बीजेपी प्रत्याशी और उर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा, साथ में हैं CM योगी आदित्यनाथ

Uttar Pradesh Elecetion 2022: उत्तर प्रदेश में पहले चरण में जिन सीटों पर सबकी नजर है, उनमें सबसे प्रमुख सीट के तौर पर मथुरा-वृंदावन (Mathura Vrindavan) को देखा जा रहा है। मथुरा विधानसभा सीट ( Mathura Constituency) से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रत्याशी श्रीकांत शर्मा (Shrikant Sharma) 2017 के विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड मतों से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे और फिर प्रदेश सरकार के ऊर्जा मंत्री बनाए गए थे।

श्रीकांत शर्मा को दिल्ली का वरदहस्त प्राप्त था और प्रदेश सरकार के प्रवक्ता के तौर पर भी उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई। ऊर्जा मंत्री के तौर पर प्रदेश में बिजली की आपूर्ति व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन की चर्चा हर कोई करता है। हालांकि, राज्य में बिजली महंगी होने की बात भी की जाती है, जिसका जवाब ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा यह देते हैं कि पिछली सरकार ने महंगी दरों पर ऊर्जा के अनुबंध किए थे, इसके बावजूद हम जनता को पूरी बिजली, कम कीमतों पर देने में सफल रहे हैं। प्रदेश में बिजली आपूर्ति की बेहतरी BJP के लिए बड़ा चुनावी मुद्दा भी है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि, पिछली बार रिकॉर्ड मतों से जीतने वाले ऊर्जा मंत्री की विधानसभा में इस बार क्या माहौल है। इसे समझने के लिए मथुरा-वृंदावन में दो दिन मैंने बिताया।

मथुरा जाने पर वृंदावन में बांके बिहारी जी का दर्शन करना हर हिन्दू के लिए अनिवार्य शर्त जैसा होता है। हमारे लिए भी बांके बिहारी जी का दर्शन आवश्यक था। मूल बांके बिहारी जी का दर्शन था, लेकिन लगे हाथ मथुरा-वृंदावन की चुनावी हलचल भी समझने की कोशिश करना था। अगर आप चश्मा लगाकर वृंदावन में बांके बिहारी जी का दर्शन करने जाते हैं तो मंदिर के लिए गलियों में घुसते कोई न कोई आपको अवश्य टोंकेगा कि, चश्मा उतारकर जेब में रख लीजिए, वरना बंदर लेकर भाग जाएगा।

मुझे भी हमेशा की तरह इस बार भी बांके बिहारी जी के मंदिर की गलियों में घुसते ही यह सलाह मिल ही गई। मैंने चश्मा निकालकर अपनी जेब में डाल लिया। मंदिर की गलियां कुछ वर्ष पहले से अधिक चौड़ी लगीं। ज्यादा स्थान दिख रहा था। साफ-सफाई की व्यवस्था भी पहले से बहुत बेहतर लग रही थी। दर्शन के बाद बांके बिहारी मंदिर के सेवादार घनश्याम गोस्वामी ने बताया कि, मथुरा-वृंदावन की गलियों में झूलते बिजली के तार अब लगभग गायब हो गए हैं और इसकी वजह से बंदरों को तारों के जरिए गलियों में बैठने का स्थान कम हो गया और अब बंदर भी इसीलिए कम दिखते हैं। तब मुझे ध्यान में आया कि, चश्मा तो जेब में रख लिया था, लेकिन पूरे रास्ते में बंदर ना के बराबर दिखे।

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