Waqf Amendment Bill Cleared By JPC: वक्फ (संशोधन) विधेयक की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने सोमवार (27 जनवरी) को बिल को मंजूरी दे दी। वक्फ विधेयक पर एक महीने से चर्चा कर रही संसद की संयुक्त समिति ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सदस्यों द्वारा प्रस्तावित सभी संशोधनों को स्वीकार कर लिया। जबकि विपक्षी सदस्यों के संशोधन प्रस्तावों को खारिज कर दिया।
समिति के अध्यक्ष जगदम्बिका पाल ने बैठक के बाद पत्रकारों को बताया कि समिति द्वारा स्वीकार किए गए संशोधनों से कानून बेहतर और प्रभावी होगा। हालांकि, विपक्षी सांसदों ने बैठक की कार्यवाही की निंदा की। उन्होंने पाल पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पलटने का आरोप लगाया।
तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी ने पत्रकारों से कहा, "यह हास्यास्पद कवायद थी। हमारी बात नहीं सुनी गई। पाल ने तानाशाही तरीके से काम किया है।" पाल ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया लोकतांत्रिक थी और बहुमत की राय को स्वीकार किया गया है।
पीटीआई के मुताबिक, समिति द्वारा प्रस्तावित अधिक महत्वपूर्ण संशोधनों में से एक यह है कि मौजूदा वक्फ संपत्तियों पर 'उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ' के आधार पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है, जो वर्तमान कानून में मौजूद है। नए संस्करण में इसे हटा दिया जाएगा, जहां संपत्तियों को केवल धार्मिक इस्तेमाल के उद्देश्यों के लिए लंबे समय तक उपयोग के आधार पर वक्फ माना जा सकता है।
पाल ने कहा कि विधेयक के 14 प्रावधानों में NDA सदस्यों द्वारा पेश संशोधनों को स्वीकार कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि विपक्षी सदस्यों ने सभी 44 प्रावधानों में सैकड़ों संशोधन पेश किए। लेकिन उनमें से सभी को मत विभाजन से खारिज कर दिया गया। वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 को अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने गत 8 अगस्त को लोकसभा में पेश किया था और इसके बाद इसे संयुक्त समिति को भेज दिया गया था।
पाल ने कहा कि विधेयक के 14 खंडों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और उसके सहयोगियों द्वारा पेश किए गए संशोधनों को स्वीकार कर लिया गया है। सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्षी सदस्यों दोनों ने विधेयक के 44 खंडों में 500 से अधिक संशोधन प्रस्तावित किए। लेकिन उसे खारिज कर दिए गए।
विपक्षी सदस्यों ने आगा खानी और शिया जैसे विशिष्ट संप्रदायों के लिए अलग-अलग वक्फ बोर्ड का कड़ा विरोध किया है। शुक्रवार को पाल पर पक्षपात का आरोप लगाने और हंगामा करने के बाद 10 विपक्षी सांसदों को एक दिन के लिए निलंबित कर दिया गया। इससे पक्ष-विपक्ष में तनाव बढ़ गया। निलंबित सासंदों में कल्याण बनर्जी, कांग्रेस के नासिर हुसैन और मोहम्मद जावेद, डीएमके के ए राजा और एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी शामिल हैं।
सोमवार देर रात या मंगलवार तक रिपोर्ट को समिति के सभी सदस्यों को भेजा जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक 29 जनवरी को रिपोर्ट आधिकारिक तौर पर स्वीकार की जाएगी। अगर विपक्ष अपना डिसेंट नोट देता है तो उसे भी रिपोर्ट का हिस्सा बनाया जाएगा। सूत्रों के मुताबित अभी तक लगभग 500 पन्नों की रिपोर्ट तैयार हुई है। डिसेट नोट जुडने के बाद पन्नों की संख्या बढ़ सकती है। वक्फ संशोधन बिल 2024 में पेश हुआ था जिसमें 1995 के बिल में 44 संशोधन लाए गए थे।