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जब बेनजीर भुट्टो ने लव मैरिज का सपना छोड़ परिवार के कहने पर कर ली थी शादी

बेनजीर भुट्टो के माता-पिता ने भी लव मैरिज की थी और बेनजीर भी उनकी तरह प्रेम विवाह ही करना चाहती थीं

Surendra Kishoreअपडेटेड May 23, 2022 पर 7:31 AM
जब बेनजीर भुट्टो ने लव मैरिज का सपना छोड़ परिवार के कहने पर कर ली थी शादी
बेनजीर भुट्टो की शादी आसिफ जरदारी से 1987 में हुई थी

सुरेंद्र किशोर

बेनजीर भुट्टो ने अपने परिवार के कहने पर अरेंज मैरेज के लिए हामी भर दी थी। और, इस तरह उन्होंने अपने एक अरमान की कुर्बानी दे दी। बेनजीर का अरमान था कि "मैं किसी ऐसे व्यक्ति से शादी करूंगी जिसे मैं जानती -समझती हो। मुझे उससे इतना प्यार हो जाए कि मैं उससे शादी करने की तमन्ना करने लगूं।" पर, यह हो न सका। आत्मकथा में वह लिखती हैं कि "मेरे राजनीतिक जीवन ने ऐसी किसी स्थिति का रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया था। किसी से भी, जहां दूर -दूर तक ऐसी बात न हों, वहां भी, जरा सी अंतरंगता दिखने पर अफवाहें फैलने और तिल का ताड़ बनने में देर न लगती।"

"पूरब की बेटी" नामक अपनी जीवनी में, बेनजीर ने लिखा है कि ज्यादातर पूरब वालों में, परिवार की तरफ से तय शादी ही की जाती है। हालांकि मेरे लिए ऐसा होना एक इत्तेफाक की बात थी। बेनजीर के माता-पिता ने प्रेम विवाह किया था। उस पृष्ठभूमि से उत्साहित बेनजीर ने सोचा था कि "मैं किसी के प्रेम में पहले डूबूंगी, फिर उससे शादी करूंगी। पर मेरी निजी जिंदगी ने सन 1987 में एक नाटकीय मोड़ लिया,जब मैंने अपने परिवार के कहने पर एक तय की हुई शादी के लिए हामी भर दी।अपने राजनीतिक जीवन के हित में मुझे अपने अरमान की कुर्बानी देनी पड़ी।"

बेनजीर के अनुसार, "शादी के लिए रिश्ते पहले से ही आने लगे थे। मैं एक पुराने और पाकिस्तान के इज्जतदार घराने की लड़की थी। उस समय प्रधान मंत्री की बेटी तो थी ही। ग्रेजुएशन स्तर की पढ़ाई करते समय अमेरिका में मैं स्त्री आंदोलनों का विकास होता देख रही थी तभी से मेरा यह सोचना था कि शादी और आजीविका दोनों में आपस में कोई विरोध नहीं है। इन्हें साथ -साथ निभाया जा सकता है। मैं किसी ऐसे आदमी से शादी करने को तैयार थी जो अपने जीवन में कुछ उद्देश्य लेकर चल रहा हो और वह मुझे भी ऐसा करने की आजादी दे। पर फौजी विद्रोह ने ऐसे किसी विचार को छितरा दिया।

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