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पुरुषों और महिलाओं के लिए शादी की उम्र समान करने की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें यह नहीं मानना चाहिए कि हम संविधान के इकलौते संरक्षक हैं। संसद भी संरक्षक है। सुप्रीम कोर्ट सीनियर वकील अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने पुरुषों और महिलाओं के लिए शादी की कानूनी उम्र एक समान करने की मांग की थी। भारत में पुरुषों को 21 वर्ष की उम्र में विवाह करने की अनुमति है, जबकि महिलाओं के लिए शादी की न्यूनतम आयु 18 साल है

Curated By: Akhileshअपडेटेड Feb 20, 2023 पर 5:40 PM
पुरुषों और महिलाओं के लिए शादी की उम्र समान करने की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज
याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए पीठ ने कहा कि हम यहां कानून नहीं बना सकते

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पुरुषों और महिलाओं के लिए शादी की न्यूनतम उम्र एक समान (Uniform minimum age for marriage) करने की मांग वाली याचिका सोमवार को खारिज कर दी। शीर्ष अदालत ने कहा कि कुछ मामले संसद के लिए होते हैं तथा अदालतें कानून नहीं बना सकतीं। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत संसद को विधेयक पारित करने के लिए आदेश नहीं दे सकती।

याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए पीठ ने कहा कि हम यहां कानून नहीं बना सकते। हमें यह नहीं मानना चाहिए कि हम संविधान के इकलौते संरक्षक हैं। संसद भी संरक्षक है। सुप्रीम कोर्ट सीनियर वकील अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने पुरुषों और महिलाओं के लिए शादी की कानूनी उम्र एक समान करने की मांग की थी।

आपको बता दें कि भारत में पुरुषों को 21 वर्ष की उम्र में विवाह करने की अनुमति है, जबकि महिलाओं के लिए शादी की न्यूनतम आयु 18 साल है।

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