मछली की एक किस्म ने बनाया करोड़पति, रातोंरात चमकी मछुआरे की किस्मत

सोवा मछली को बहुमूल्य और दुर्लभ माना जाता है क्योंकि इसके पेट से निकलने वाले पदार्थों में बेहतरीन उपचार और औषधीय गुण होते हैं। मछली से प्राप्त धागे जैसे पदार्थ का इस्तेमाल सर्जरी प्रोसीजर में किया जाता है। सोवा मछली सांस्कृतिक और पारंपरिक महत्व भी रखती है। इसका इस्तेमाल पारंपरिक दवाओं और स्थानीय व्यंजनों में किया जाता है

अपडेटेड Nov 11, 2023 पर 12:03 PM
Story continues below Advertisement
1.5 मीटर तक लंबाई वाली इस मछली की पूर्वी एशियाई देशों में बहुत मांग है।

एक मछुआरा कई औषधीय गुणों वाली दुर्लभ मछली की नीलामी के बाद रातोंरात करोड़पति बन गया है। वाकया पाकिस्तान के कराची शहर का है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इब्राहिम हैदरी गांव में रहने वाले हाजी बलोच और उनके दल ने सोमवार 6 नवंबर को अरब सागर से कई ‘गोल्डन फिश’ पकड़ीं। इस मछली को स्थानीय बोली में ‘सोवा’ कहा जाता है। ‘पाकिस्तान फिशरमेन फोक फोरम’ के मुबारक खान ने कहा, ‘शुक्रवार सुबह कराची बंदरगाह पर मछुआरों ने नीलामी में इन सभी मछलियों को लगभग सात करोड़ रुपये में बेच दिया।’

“सोवा” मछली को बहुमूल्य और दुर्लभ माना जाता है क्योंकि इसके पेट से निकलने वाले पदार्थों में बेहतरीन उपचार और औषधीय गुण होते हैं। मछली से प्राप्त धागे जैसे पदार्थ का इस्तेमाल सर्जरी प्रोसीजर में किया जाता है। अक्सर 20 से 40 किलोग्राम वजन और 1.5 मीटर तक लंबाई वाली इस मछली की पूर्वी एशियाई देशों में बहुत मांग है।

Diwali Picks: संवत 2080 के लिए इन 5 शेयरों पर लगाएं दांव, करा सकते हैं बंपर मुनाफा; Religare Broking की है हॉटलिस्ट


इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि “सोवा” मछली सांस्कृतिक और पारंपरिक महत्व भी रखती है। इसका इस्तेमाल पारंपरिक दवाओं और स्थानीय व्यंजनों में किया जाता है। बलोच ने कहा, ‘हम कराची के खुले समुद्र में मछली पकड़ रहे थे…तभी हमें सुनहरी मछली मिली और यह हमारे लिए अचानक से हुई घटना थी।’ हाजी ने कहा कि वह यह पैसा अपने सात लोगों के दल के साथ साझा करेंगे।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।