देश के अलग-अलग राज्यों में भारतीय सेना में भर्ती की नई योजना अग्निपथ को लेकर असंतोष नजर आ रहा है। योजना के विरोध में उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, हरियाणा और राजस्थान सहित कई अलग-अलग राज्यों में युवा प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शन का सबसे अधिक असर बिहार में देखने को मिल रहा है। बिहार के छपरा के कई ऐसे वीडियो और तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें नाराज युवा टायर जला रहे हैं।
इसके अलावा जहानाबाद में रेल और सड़क यातायात को भी रोका गया। छपरा में प्रदर्शनकारियों ने एक ट्रेन की पूरी बोगी को आग के हवाले कर दिया। छपरा के अलावा युवाओं ने कैमूर और भभुआ में भी एक ट्रेन में आग लगा दी। हालांकि इस दौरान पुलिस सतर्क दिखी और आनन-फानन में आग को बुझा दिया गया नहीं तो कोई बड़ी घटना घट सकती थी।
आरा रेलवे स्टेशन पर प्रदर्शनकारियों ने जमकर तोड़फोड़ की। जहानाबाद में छात्र रेलवे स्टेशन पर पहुंचे और रेल पटरी पर प्रदर्शन किए। हालांकि पुलिस ने छात्रों को खदेड़ दिया। इसके अलावा नवादा, आरा, अरवल में भी छात्र सड़कों पर उतरे और केंद्र सरकार के विरोध में नारे लगाते हुए उग्र प्रदर्शन किया।
राष्ट्र के समक्ष पेश आने वाली भावी सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार ने दशकों पुरानी रक्षा भर्ती प्रक्रिया में आमूलचूल परिवर्तन करते हुए, थलसेना, नौसेना और वायुसेना में सैनिकों की भर्ती संबंधी ‘अग्निपथ’ योजना की घोषणा की है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार 14 जून को अग्निपथ योजना की घोषणा की। इस योजना के तहत भारतीय सेना में 4 सालों के लिए युवाओं की भर्तियां होंगी। 4 साल नौकरी करने के बाद उन्हें सेवा निधि पैकेज दिया जाएगा।
‘अग्निपथ’ योजना के तहत तीनों सेनाओं में इस साल करीब 46,000 सैनिक भर्ती किए जाएंगे। चयन के लिए पात्रता आयु साढ़े 17 वर्ष से 21 वर्ष के बीच होगी और इन्हें ‘अग्निवीर’ नाम दिया जाएगा। सैनिकों की भर्ती चार साल की अवधि के लिए संविदा आधार पर की जाएगी।
एअर मार्शल मानवेंद्र सिंह ने बुधवार को कहा कि भारतीय सशस्त्र बल नई शुरू की गई अग्निपथ योजना के तहत चार साल के लिए ‘युवा अग्निवीरों’ की भर्ती करते समय कैडेट की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं करेंगे।
'अग्निवीरों' के सेवा से बाहर होने के बाद सरकारी नौकरियों में आरक्षण या वरीयता के सवाल पर एअर मार्शल सिंह ने कहा कि उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) और असम राइफल्स जैसे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में वरीयता दी जाएगी।
छात्रों क्यों कर रहे हैं विरोध?
छात्रों का कहना है कि चार साल की नौकरी के बाद 25 प्रतिशत छात्रों को तो नौकरी मिल जाएगी, लेकिन 75 फीसदी लोग बेरोजगार हो जाएंगे। प्रदर्शन में शामिल एक छात्र ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा कि सेना में भर्ती के लिए हम जी-तोड़ मेहनत करते हैं। ऐसा कैसे हो सकता है कि 4 साल की नौकरी हो और महीनों की ट्रेनिंग और 4 साल पूरा होने के बाद नौकरी खत्म। आखिर तीन महीने की ट्रेनिंग लेकर हम देश की रक्षा कैसे कर पाएंगे?
प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांग है कि केंद्र सरकार इस योजना को तत्काल वापस ले। एक अन्य छात्र ने योजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि सिर्फ 4 की नौकरी...और उसके बाद हम कहां जाएंगे? छात्रों ने कहा कि अपना विरोध जताने के लिए हमने सड़क जाम किया है।