उत्तर प्रदेश के आगरा जीआरपी ने 22 साल बाद एक बेटे को उसके परिवार से मिला दिया। 22 साल बाद बेटा अपनी मां के गले लगा। 4 साल की उम्र में बेटा अपने घरवालों से बिछड़ गया था। दिल्ली के बाल सुधार गृह में नौकरी कर रहा था। अपने बेटे को गले लगा मां के आंसू थम ही नहीं रहे थे। इस खबर की जानकारी मिलते ही लोग उनके घर मिलने पहुंचने लगे। युवक को सुरक्षित देखकर हर किसी नेखुशी जताई। यह पूरी घटना प्रयास बाल गृह का है। यहां मार्च 2024 में पुलिस बच्चों की काउंसलिंग कर रही थी। इसी बीच वहां पर सफाई करने वाला बबलू शर्मा पुलिस के पास आया। उसने अपने बारे में बताया।
बबलू ने कहा कि मेरा परिवार भी ढूंढ दीजिए। मैं जब छोटा था तो जून 2002 के लगभग घर से निकल आया था। फिर कभी घर नहीं पहुंचा हूं। उसने अपने पिता का नाम सुखदेव और मां का नाम अंगूरी देवी बताया था और गांव का नाम धनौरा है।
गूगल मैप से मिला परिवार का पता
जीआरपी निरीक्षक मुस्कान टीम के रिपुदमन सिंह ने बताया कि सी प्लान ऐप और गूगल मैप के जरिए गांव का नाम ढूंढना शुरू किया। काफी सर्च करने पर पता चला कि बिजनौर, बागपत और बुलंदशहर जिले में धनौरा गांव मिले। यहां पता किया गया, लेकिन किसी ने नहीं बताया कि कोई बेटा 22 साल पहले खो गया है। माता-पिता के नाम भी यहां मैच नहीं हुए। इसके बाद जीआरपी टीम ने बबलू से फिर पूछताछ शुरू की। बबलू ने बताया कि वो ट्रेन से दिल्ली गया था। फिर से मुस्कान टीम ने तलाश शुरू की। पुलिस को सुराग मिला कि बबलू का गांव चोला रेलवे स्टेशन के पास स्थित धनौरा है। इसके बाद वहां संपर्क किया गया और बबलू की तस्वीर गांव में भेजी गई।
माता-पिता ने बेटे को पहचान लिया
कुछ दिनों बाद जीआरपी पुलिस को फोन आया, जिसमें तस्वीर के बारे में बताया गया कि उनका बेटा खो गया था। तस्वीर देखकर उन्होंने कहा कि यही हमारा बेटा है। पुलिस ने सुखदेशव शर्मा से पूछताछ की और बताए गए डेटा से बबलू का मैच कराया गया। जिसमें सही मिला। पिता ने बताया कि 5-6 साल तक ढूंढे थे, लेकिन कोई सुराग नहीं लगा तो फिर थक हारकर बैठ गए। फिलहाल बबलू को सकुशल सौंप दिया गया। बबलू को देखते ही माता- पिता के खुशी के आंसू छलक उठे।