Aluminum Foil: आजकल घर हो या बाजार। खाने को पैक करने के लिए ज्यादातर लोग एल्युमिनियम फॉयल (Auminium Foil) का इस्तेमाल करते हैं। पिछले कुछ समय से एल्युमिनियम फॉयल का प्रयोग काफी बढ़ा है। कहा जाता है कि इसमें खाना पैक करने से लंबे समय तक फ्रेश और गर्म बना रहता है। शायद आपको पता न हो लेकिन एल्युमिनियम फॉयल में रखा खाना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। जब भी गर्म भोजन इसमें लपेटते हैं तो एल्युमिनियम गर्म हो जाता है। इसमें प्रतिक्रिया शुरू हो जाती है। लिहाजा एल्युमिनियम के कुछ अंश खाने में भी मिल जाते हैं।
वैसे तो एल्यूमिनियम फॉयल में खाना पैक करना खतरनाक नहीं होता है। लेकिन लंबे समय तक इसमें खाना नहीं रखना चाहिए। भोजन को एल्यूमिनियम फॉयल में रैप करने से उसमें एल्युमिनियम कंटेंट मिक्स हो जाते हैं। इससे आपकी सेहत और हड्डियों को नुकसान पहुंच सकता है।
जानिए कैसे बनता है एल्युमिनियम फॉयल
एल्युमिनियम फॉयल में प्योर एल्युमिनियम नहीं होता है। बल्कि इसमें एलॉय वाले एल्युमिनियम यानी मिक्स मेटल का इस्तेमाल किया जाता है। एल्युमिनियम फॉयल बनाने के लिए सबसे पहले इसे पिघलाया जाता है। एक खास तरह की मशीन में इससे बनाकर तैयार किया जाता है। जिसे रोलिंग मिल कहते हैं। इस मशीन का प्रेशर 0.01 फीसदी होता है। अब इसे कोल्ड रोलिंग मिल में डाला जाता है। ठंडा होने के बाद इसे पतला किया जाता है। इसके बाद इस पर मेटल की परत चढ़ाई जाती है। जिससे ये हार्ड एल्युमिनियम पतली नजर आने लगती है। जब भी आप एल्युमिनियम फॉयल में खाना रखते हैं। तब इस बात का ध्यान रखें कि फॉयल से खाने में एल्युमिनियम का एक भी टुकड़ा न रह जाएं।
एल्यूमिनियम फॉयल में पैक खाना खाने से आपके मस्तिष्क के कुछ हिस्सों का नुकसान पहुंच सकता है। इससे अल्जाइमर भी हो सकता है। अल्जाइमर एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है जो मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने से होता हैं। जिससे स्मरण शक्ति कमजोर हो जाती है। 4 से 5 घंटे से ज्यादा एल्युमिनियम फॉयल में खाना रखना हानिकारक हो सकता है। एसिटिक चीजों को फॉयल पेपर में रखने से बचना चाहिए। इससे चीजें जल्दी खराब हो सकती हैं या फिर उनका केमिकल बैलेंस भी बिगड़ सकता है।