CBI ने 100 करोड़ रुपये में राज्यसभा सीट और राज्यपाल पद दिलाने का वादा करने वाले रैकेट का किया भंडाफोड़, 4 गिरफ्तार

CBI ने आज ऐसे गैंग का भंडाफोड़ किया है जो राज्यसभा सीट और राज्यपाल पद दिलाने के झूठे वादे कर ठगी करता था। ये गैंग 100 करोड़ रुपये की ठगी करने की कोशिश में जुटा हुआ था। CBI ने इस अंतरराज्यीय गिरोह के 4 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है

अपडेटेड Jul 25, 2022 पर 5:40 PM
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आरोपियों ने झूठा आश्वासन देकर आम लोगों से भारी-भरकम राशि ऐंठने की साजिश की

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने राज्यसभा सीट (Rajya Sabha Seat) और राज्यपाल पद (Governor Post) दिलाने के झूठे वादे को लेकर लोगों से कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये की ठगी करने की कोशिश करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि जांच एजेंसी ने इस मामले में हाल में कई जगहों पर छापेमारी की और गिरोह के 4 सदस्यों को गिरफ्तार किया है।

अधिकारियों के मुताबिक, तलाशी अभियान के दौरान एक आरोपी सीबीआई अधिकारियों पर हमला कर फरार होने में कामयाब रहा। उन्होंने बताया कि फरार आरोपी के खिलाफ जांच एजेंसी के अधिकारियों पर हमला करने के आरोप में स्थानीय पुलिस थाने में एक अलग FIR दर्ज की गई है।

अधिकारियों के अनुसार, FIR में सीबीआई ने महाराष्ट्र के लातूर जिले के रहने वाले कमलाकर प्रेमकुमार बंदगर, कर्नाटक के बेलगाम निवासी रवींद्र विट्ठल नाइक और दिल्ली-एनसीआर के रहने वाले महेंद्र पाल अरोड़ा, अभिषेक बूरा एवं मोहम्मद एजाज खान को नामजद किया है।


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एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि बंदगर खुद को एक सीनियर सीबीआई अधिकारी के रूप में पेश करता था। इतना ही नहीं उच्च पदस्थ अधिकारियों के साथ अपने संबंधों का हवाला देते हुए बूरा, अरोड़ा, खान और नाइक से कोई भी ऐसा काम लाने को कहता था, जिसे वह भारी-भरकम रकम के एवज में पूरा करवा सकता है।

ऐसे रच रहे थे साजिश

FIR के मुताबिक, आरोपियों ने राज्यसभा की सीट दिलवाने, राज्यपाल के रूप में नियुक्ति करवाने और केंद्र सरकार के मंत्रालयों एवं विभागों के अधीन आने वाली विभिन्न सरकारी संस्थाओं का अध्यक्ष बनवाने का झूठा आश्वासन देकर आम लोगों से भारी-भरकम राशि ऐंठने के गलत इरादे से साजिश रची।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, सीबीआई को अपने सूत्र से पता चला कि बूरा ने बंदगर से चर्चा की थी कि कैसे नियुक्तियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले उच्च पदस्थ अधिकारियों के साथ बूरा के कथित संबंधों का इस्तेमाल काम निकलवाने के लिए किया जा सकता है।

इसमें आरोप लगाया गया है कि आरोपी 100 करोड़ रुपये के एवज में राज्यसभा की उम्मीदवारी दिलवाने के झूठे वादे के साथ लोगों को ठगने की कोशिशों में जुटे थे। FIR के मुताबिक, सीबीआई को सूचना मिली थी कि आरोपी सीनियर IAS अधिकारियों और राजनीतिक पदाधिकारियों के नाम का इस्तेमाल करेंगे, ताकि किसी काम के लिए उनसे संपर्क करने वाले ग्राहकों को सीधे या फिर अभिषेक बूरा जैसे बिचौलिए के माध्यम से प्रभावित किया जा सके।

अधिकारियों के अनुसार, यह भी पता चला है कि बंदगर ने खुद को सीबीआई के एक सीनियर अधिकारी के रूप में पेश किया था और विभिन्न पुलिस थानों के अधिकारियों से अपने परिचित लोगों का काम कराने को कहा था। उसने विभिन्न मामलों की जांच को प्रभावित करने की कोशिश भी की थी।

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