ABG Shipyard Bank Loan Scam: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मंगलवार को कहा कि उसने 22,842 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले के संबंध में ऋषि अग्रवाल और एबीजी शिपयार्ड के अन्य डायरेक्टरों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे देश छोड़कर न जाएं। केंद्रीय एजेंसी ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है।
समाचार एजेंसी एएनआई ने सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा कि 22,842 करोड़ रुपये के बैंक लोन धोखाधड़ी मामले में एबीजी शिपयार्ड के डायरेक्टरों के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) जारी किए गए थे। केंद्रीय जांच ब्यूरो के अनुसार, दो साल पहले बैंकों से प्राप्त एक फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट में अप्रैल 2012 और जुलाई 2017 में धोखाधड़ी के मामले पाए गए थे।
CBI ने 12 फरवरी को देश के सबसे बड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड और उसके तत्कालीन चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर ऋषि कमलेश अग्रवाल सहित अन्य के खिलाफ FIR दर्ज किया था। अधिकारियों ने बताया कि यह मुकदमा भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की अगुवाई वाले बैंकों के एक संघ से कथित रूप से 22,842 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी के संबंध में दर्ज किया गया।
एजेंसी ने अग्रवाल के अलावा तत्कालीन एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर संथानम मुथास्वामी एवं तीन डायरेक्टरों अश्विनी कुमार, सुशील कुमार अग्रवाल और रवि विमल नेवेतिया सहित एक अन्य कंपनी एबीजी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ भी कथित रूप से आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आधिकारिक दुरुपयोग जैसे अपराधों के लिए मुकदमा दर्ज किया। उन्होंने बताया कि इन लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा किया गया है।
बैंकों के संघ ने सबसे पहले आठ नवंबर 2019 को शिकायत दर्ज कराई थी, जिस पर सीबीआई ने 12 मार्च 2020 को कुछ स्पष्टीकरण मांगा था। बैंकों के संघ ने उस साल अगस्त में एक नई शिकायत दर्ज की और डेढ़ साल से अधिक समय तक जांच करने के बाद सीबीआई ने इस पर कार्रवाई की। अधिकारी ने कहा कि कंपनी को एसबीआई के साथ ही 28 बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने 2468.51 करोड़ रुपये के लोन को मंजूरी दी थी।
उन्होंने कहा कि फॉरेंसिक ऑडिट से पता चला है कि वर्ष 2012-17 के बीच आरोपियों ने कथित रूप से मिलीभगत की और अवैध गतिविधियों को अंजाम दिया, जिसमें लोन का दुरुपयोग और आपराधिक विश्वासघात शामिल है। यह सीबीआई द्वारा दर्ज सबसे बड़ा बैंक धोखाधड़ी का मामला है।
CBI ने मंगलवार को कहा कि प्राइवेट शिपिंग फर्म एबीजी शिपयार्ड के बैंक अकाउंट को 2013 में भारतीय स्टेट बैंक के अनुसार नॉन प्रॉफिटेबल एसेट्स यानी NPA (non-profitable assets) घोषित किया गया था और यह तब हुआ था, जब कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार सत्ता में थी।