Covid-19 JN.1: कोरोना वायरस का कहर खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। कुछ दिनों तक सुस्ती के बाद अब कोरोना वायरस संक्रमण ने फिर से रफ्तार पकड़ ली है। कोरोना वायरस के नए सब वेरिएंट JN.1 से संक्रमित मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। कई देशों में नए सब वेरिएंट से संक्रमित मरीजों में जोरदार उछाल देखने को मिला है। इस बीच INSACOG के सलाहकार बोर्ड के सह-अध्यक्ष डॉ. सौमित्र दास (Dr Saumitra Das) ने कहा कि इस साल छुट्टी के समय कई देशों में कोरोना वायरस के नए वेरिएंट JN.1 का कहर जारी है। लेकिन भारत में अभी इसका कोई खतरा नहीं है। एक खास मुलाकात में उन्होंने ये बातें कही हैं।
माइक्रोबायोलॉजिस्ट दास ने कहा कि सरकार को एयरपोर्ट पर निगरानी बढ़ा देनी चाहिए। वहीं एक बार फिर से कोविड-19 टेस्ट की व्यवस्था को फिर से ठीक करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कोरोना के मामले बढ़ने से कुछ भी असमान्य नहीं है। कुछ भी चिंता की बात नहीं है। कोरोना के जो भी मामले बढ़ रहे हैं। वो COVID -19 के BA.2.86 वेरिएंट का सब वेरिएंट JN.1 के हैं। यह ओमीक्रोन से आया है।
कोरोना वायरस का यह नया वेरिएंट दुनिया के 38 से ज्यादा देशों में फैल चुका है। दिसंबर के महीने में क्रिसमस और छुट्टियों का समय होता है। ऐसे में लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है। लिहाजा एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग बढ़ा देनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि हमें ध्यान देना चाहिए कि हमेशा हर नई लहर दिसंबर महीने में या सर्दी के समय ही आती है। पहली लहर हो या फिर डेल्टा लहर और ओमीक्रोन लहर भी इसी समय आई। दास ने कहा कि INSACOG हर एक स्थिति की बारीकी से नजर बनाए हिए हैं। जिसमे अन्य वेरिएंट के साथ JN.1 बड़े पैमाने पर शामिल है।
केरल में मिला JN.1 से संक्रमित केस
बता दें कि केरल में 8 दिसंबर को कोविड-19 के सब-वेरिएंट JN.1 का एक मामला दर्ज हुआ है। 79 साल की महिला के नमूना का 18 नवंबर को RT-PCR परीक्षण में पॉजिटिव रिजल्ट आया था। महिला में जुकाम जैसी बीमारियों (आईएलआई) के हल्के लक्षण थे। वह कोविड-19 से उबर चुकी थीं। JN.1 की पहचान पहली बार लक्जमबर्ग में की गई थी। कई देशों में फैला यह संक्रमण पिरोलो वेरिएंट (बीए.2.86) से जुड़ा है। केरल में पहला मामला सामने आने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कई उपाय शुरू कर दिए हैं।
दास ने इस बातचीत में आगे कहा कि भारत में वैक्सीनेशन अधिक होने से स्थिति बेहतर है। यहां 90 फीसदी आबादी का वैक्सीनेशन हो चुका है। यहां अस्पताल में भर्ती होने या वेंटीलेटर की जरूरतों में इजाफा देखने को नहीं मिला है।