Cyclone Dana: चक्रवात दाना की आहट से अलर्ट! कोस्ट गार्ड के विमान और जहाज तैनात, ओडिशा में 800 शेल्टर होम तैयार
चक्रवात दाना के मद्देनजर 24 अक्टूबर को ओडिशा के पुरी, खुर्दा, गंजम और जगतसिंहपुर जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है, जहां भारी से बहुत भारी बारिश के साथ-साथ बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है। राज्य सरकार ने ओडिशा के सभी 14 संभावित प्रभावित जिलों में स्कूलों और कॉलेजों को 23 से 25 अक्टूबर तक बंद रखने को कहा है
Cyclone Dana: चक्रवात दाना की आहट से अलर्ट! कोस्ट गार्ड के विमान और जहाज तैनात, ओडिशा में 800 शेल्टर होम तैयार
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सोमवार को भविष्यवाणी की कि बंगाल की खाड़ी के ऊपर बन रहा लो प्रेशर एयरिया 23 अक्टूबर तक एक गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल सकता है और अगले दिन ओडिशा और पश्चिम बंगाल से सटे तटों तक पहुंच सकता है। ऐसी संभावना है कि चक्रवात दाना के कारण शुक्रवार तक कम से कम तीन दिनों तक दोनों राज्यों में भारी बारिश होगी। IMD ने भविष्यवाणी की है कि बुधवार से ओडिशा-पश्चिम बंगाल के तटों पर हवा की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है और 24 अक्टूबर की रात से 25 अक्टूबर की सुबह तक धीरे-धीरे बढ़कर 100-110 Km प्रति घंटे और 120 Km प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। मौसम एजेंसी ने तटीय इलाकों के मछुआरों को इस हफ्ते समुद्र में न जाने की चेतावनी दी है।
चक्रवात दाना के मद्देनजर 24 अक्टूबर को ओडिशा के पुरी, खुर्दा, गंजम और जगतसिंहपुर जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है, जहां भारी से बहुत भारी बारिश के साथ-साथ बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है। राज्य सरकार ने ओडिशा के सभी 14 संभावित प्रभावित जिलों में स्कूलों और कॉलेजों को 23 से 25 अक्टूबर तक बंद रखने को कहा है।
गंजम, पुरी, जगतसिंहपुर, केंद्रपाड़ा, भद्रक, बालासोर, मयूरभंज, क्योंझर, ढेंकनाल, जाजपुर, अंगुल, खोरधा, नयागढ़ और कटक जिलों में स्कूल बंद रहेंगे।
इसके अलावा, IMD ने 23 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल के तटीय जिलों में भारी बारिश की भविष्यवाणी की है। पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर और उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिलों के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
कोस्ट गार्ड ने जहाज और विमान किए तैनात
इंडियन कोस्ट गार्ड (ICG) ने मंगलवार को कहा कि वह बंगाल की खाड़ी के ऊपर चक्रवाती तूफान बनने की आशंका के मद्देनजर किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटने के लिए एकदम सतर्क हैं और उसने अपने जहाजों और विमानों को भी तैनात कर दिया।
इसमें कहा गया है कि कोस्ट गार्ड्स पश्चिम बंगाल और ओडिशा में स्थानीय प्रशासन और डिजास्टर मैनेजमेंट प्राधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
ICG ने मछुआरों और नाविकों को नियमित मौसम चेतावनी और सुरक्षा से जुड़ी एडवाइजरी जारी करने के लिए पश्चिम बंगाल के हल्दिया और ओडिशा के पारादीप में हेलीकॉप्टर और ‘रिमोट ऑपरेटिंग स्टेशन’ तैनात किए।
बयान के अनुसार, कोस्ट लाइन पर मछुआरा समुदायों को चक्रवात के गुजरने तक समुद्र में नहीं उतरने की सलाह दी गई है। इसमें कहा गया है कि NDRF ने किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पश्चिम बंगाल में अभी तक नौ टीम को तैनात किया है।
ओडिशा सरकार ने बनाए 800 शेल्टर होम
वहीं ओडिशा सरकार ने संवेदनशील इलाकों से बाहर निकाले जाने वाले लोगों के लिए करीब 800 शेल्टर होम तैयार किए हैं।
ओडिशा के राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने मंगलवार को बताया कि अधिकारियों ने अब तक 250 चक्रवात राहत केंद्रों का दौरा किया है, जहां लोगों को उनके घरों से बाहर निकाले जाने के बाद रखा जाएगा।
उन्होंने बताया कि चक्रवाती तूफान के खतरे को देखते हुए सुरक्षित जगहों पर पहुंचाए जाने वाले लोगों के लिए भोजन, पानी, दवा, बिजली और दूसरी जरूरी वस्तुएं तैयार रखी गई हैं।
मंत्री ने बताया कि 800 चक्रवात शेल्टर के अलावा, स्कूल और कॉलेजों सहित 500 अतिरिक्त टेंपरेरी शेल्टर भी तैयार किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि अधिकारियों को चक्रवात आश्रय स्थलों में महिलाओं के लिए व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। इन शेल्टर होम में महिला पुलिसकर्मियों की तैनात की जाएगी।
मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने चक्रवात के खतरे को देखते हुए किसी भी तरह का नुकसान न हो यह सुनिश्चित करने के लिए संवेदनशील इलाकों से सभी लोगों को बाहर निकालने पर जोर दिया है।
मंत्री ने कहा कि सरकार ने उन गर्भवती महिलाओं की लिस्ट भी तैयार की है, जिनकी दो हफ्ते के भीतर डिलीवरी होने की संभावना है। आपदा के दौरान किसी भी तरह की परेशानी से बचने के लिए उन सभी महिलाओं को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है।
मंत्री ने एक सवाल के जवाब में कहा कि कुछ लोग चोरी के डर के कारण अपना घर खाली करने से कतरा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस को उन गांवों में गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, जहां लोगों को चक्रवात आश्रय स्थलों में पहुंचाया जाएगा।
अगस्त के आखिर में आए चक्रवात असना के बाद दो महीने में ये दूसरा चक्रवात है, जो भारतीय तट से टकराने वाला है। ज्यादातर चक्रवाती तूफानों की पहचान दिलचस्प नामों से की जाती है जैसे- तितली, बिपरजॉय, निसर्ग या फानी।
ये अनोखे नाम चक्रवातों को बेतरतीब ढंग से नहीं दिए गए हैं और वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन (WMO) की ओर से तैयार की गई एक वेल-प्लांड सिस्टम के आधार पर दिए गए हैं। सिस्टम को समझने से पहले जानिए कि चक्रवात दाना का नाम कैसे पड़ा।
चक्रवात दाना का नाम कैसे पड़ा?
रिपोर्ट के अनुसार, चक्रवात दाना का नाम WMO की ओर से तैयार ट्रॉपिकल साइक्लोन नेमिंग सिस्टम के अनुसार कतर द्वारा रखा गया था। ट्रॉपिकल साइक्लोन के नामकरण की क्षेत्र की मानक परंपरा के आधार पर चक्रवाती तूफानों के लिए नाम सुझाए जाते हैं।
चक्रवातों के नाम कैसे रखे जाते हैं?
ज्यादातर चक्रवातों का नाम उन देशों के ग्रुप की ओर से रखा जाता है, जो विश्व मौसम विज्ञान संगठन का हिस्सा हैं। समूह में बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका और थाईलैंड जैसे देश शामिल थे।
समूह ने साल 2000 में क्षेत्र में चक्रवातों का नाम देना शुरू किया। सिस्टम के अनुसार, सभी सदस्य देश अपने सुझाव WMO पैनल को भेजते हैं, जो बाद में नामों के साथ ट्रॉपिकल साइक्लोन की लिस्ट को अंतिम रूप देता है।
कुछ साल पहले 2018 में संगठन का और विस्तार हुआ, जब ईरान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और यमन को इसमें जोड़ा गया। सिस्टम के अनुसार, सभी 13 सदस्य देशों को चक्रवात के नामों के लिए 13 सुझाव भेजने होते हैं, जिन्हें उसके हिसाब से लिस्ट में शामिल किया जाता है।