Dantewada Naxal Attack: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में बुधवार को नक्सलियों ने सुरक्षाकर्मियों को ले जा रहे गाड़ियों के काफिले में शामिल एक वाहन को विस्फोट से उड़ा दिया। इस घटना में 10 पुलिसकर्मी शहीद हो गए। साथ ही इस नक्सली हमले में एक ड्राइवर की भी मौत हो गई। बारूदी सुरंग विस्फोट में शहीद हुए सुरक्षाबल के 10 DRG (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) जवानों और ड्राइवर को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तथा अन्य नेताओं ने श्रद्धांजलि दी। श्रद्धांजलि के दौरान शहीद पुलिस जवानों और वाहन चालक के रोते-बिलखते परिजनों ने 'भारत माता की जय' के नारे के साथ शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की।
इस बीच नक्सली हमले का एक वीडियो सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। वीडियो में एक पुलिसकर्मी जमीन पर रेंगते हुए पोजीशन में आता हुआ दिख रहा है और इसके बाद वो विस्फोट करने वाले नक्सलियों पर जवाबी फायरिंग करता है। CNN-News18 के मुताबिक, इस वीडियो को पीछे से आ रही एक गाड़ी में सवार जवान ने बनाया है।
ग्रामीणों ने घटना की रिकार्डिंग भी की। हालांकि, पुलिस ने अभी तक वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं की है। धमाके के तुरंत बाद फायरिंग की आवाज के साथ एक व्यक्ति को सड़क के किनारे रेंगते हुए देखा जा सकता है। सड़क के उस पार एक धागे जैसी चीज भी पड़ी हुई देखी जा सकती है, जिसके बारे में संदेह है कि यह IED से जुड़ा तार है, जिसने सुरक्षाकर्मियों को ले जा रहे वाहन को उड़ा दिया।
इस वीडियो में साफ सुना जा रहा है कि "भैय्या उड़ गया... पूरा उड़ गया" फिर एक तेज धमाके की आवाज भी होती है। वीडियो में सड़क से कुछ दूरी पर हेवी ब्लास्टिंग से उठा गहरा धुआं भी दिख रहा है। ये वीडियो मौके पर मौजूद एक अन्य पुलिसकर्मी ने शूट किया है, जो विस्फोट के बाद एक अन्य वाहन के पीछे छिपकर नक्सलियों से मुकाबला कर रहा था।
वीडियो शूट करने वाला सामने आया जवान
जिस जवान ने वीडियो शूट किया, उन्होंने NDTV से बातचीत में कहा कि नक्सल विरोधी अभियान के लिए हम सभी मंगलवार से बाहर थे। बुधवार दोपहर करीब 1.30 बजे जब धमाका हुआ तो हम वापस लौट रहे थे। सात गाड़ियों के काफिले में से उन्होंने तीसरी गाड़ी पर निशाना लगाया, जिसमें जवान सवार थे। उनमें जीवित कोई नहीं बचा। सभी जवानों की मौत हो चुकी थी।
दंतेवाड़ा के अरनपुर थाना क्षेत्र में बुधवार दोपहर नक्सलियों ने एक मल्टी-यूटिलिटी व्हीकल (SUV) को उड़ा दिया, जो सुरक्षाकर्मियों के काफिले का हिस्सा था। इसमें 10 पुलिसकर्मी और एक ड्राइवर की मौत हो गई। मरने वाले 10 कर्मियों में से 8 दंतेवाड़ा जिले के निवासी थे, जबकि एक-एक पड़ोसी सुकमा और बीजापुर जिले के थे। उनमें से कुछ नक्सलवाद छोड़ने के बाद पुलिस में शामिल हुए थे।
पहले भी हो चुके हैं बड़े हमले
इससे पहले 3 अप्रैल 2021 में सुकमा और बीजापुर जिलों की सीमा पर नक्सलियों ने घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में 22 जवान शहीद हो गए थे। इससे पहले 21 मार्च, 2020 को सुकमा के मिनपा इलाके में नक्सली हमले में 17 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे। वहीं, 9 अप्रैल, 2019 को दंतेवाड़ा जिले में एक नक्सली विस्फोट में भाजपा विधायक भीमा मंडावी और चार सुरक्षाकर्मी मारे गए थे तथा सुकमा में 24 अप्रैल, 2017 को बुरकापाल हमले में CRPF के 25 जवानों की मौत हो गई थी। वहीं, साल 2010 में ताड़मेटला (तब दंतेवाड़ा में) में हुए सबसे बड़े नक्सली हमले जिसमें 76 जवानों की मौत हो गई थी।