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Dollar-Free Trade: डॉलर का दबदबा अब नहीं लौटने वाला, रुस के विदेश मंत्री का दावा, चेक करें अपने रुपये की क्या है स्थिति

Dollar-Free Trade: कुछ समय पहले तक अमेरिकी डॉलर के बिना अंतरराष्ट्रीय लेन-देन की कल्पना भी मुश्किल थी। हालांकि अब इसका दबदबा धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। कई देश अपनी-अपनी करेंसी में लेन-देन कर रहे हैं। हालांकि सवाल यह उठता है कि क्या वाकई डॉलर का दबदबा कम हो रहा है। इसे लेकर जानिए रुस के विदेश मंत्री दावा है कि अब डॉलर पहले जैसी स्थिति में नहीं लौट पाएगा। चेक करें भारत की क्या स्थिति है

Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड Apr 27, 2023 पर 9:54 AM
Dollar-Free Trade: डॉलर का दबदबा अब नहीं लौटने वाला, रुस के विदेश मंत्री का दावा, चेक करें अपने रुपये की क्या है स्थिति
रुस के विदेश मंत्री का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कारोबार और वर्ल्ड इकनॉमी के लिए अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता ने कई देशों की दिक्कतें बढ़ाई हैं। ऐसे में अब उभरती अर्थव्यवस्था वाले देश, मिडिल-ईस्ट में तेल उत्पादक और यूरोप आपसी सौदों के लिए बाईलेटरल करेंसी एग्रीमेंट्स कर रहे हैं यानी कि दो देश अपनी-अपनी करेंसी में लेन-देन के लिए समझौता कर रहे हैं।

Dollar-Free Trade: कुछ समय पहले तक अमेरिकी डॉलर के बिना अंतरराष्ट्रीय लेन-देन की कल्पना भी मुश्किल थी। हालांकि अब इसका कब्जा धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। कई देश अपनी-अपनी करेंसी में लेन-देन कर रहे हैं। हालांकि सवाल यह उठता है कि क्या वाकई डॉलर का दबदबा कम हो रहा है। रुस के विदेश मंत्री सर्जी विक्टरविच लारोव (Sergey Viktorovich Lavrov) ने हाल ही में दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय कारोबार के लिए डॉलर के इस्तेमाल को बंद करना और घरेलू करेंसी पर स्विच होने का रुझान यानी डी-डॉलराईजेशन (De-Dollarisation) अब पलटने वाला नहीं है।

क्या है De-Dollarisation?

रुस के विदेश मंत्री का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कारोबार और वर्ल्ड इकनॉमी के लिए अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता ने कई देशों की दिक्कतें बढ़ाई हैं। ऐसे में अब उभरती अर्थव्यवस्था वाले देश, मिडिल-ईस्ट में तेल उत्पादक और यूरोप आपसी सौदों के लिए बाईलेटरल करेंसी एग्रीमेंट्स कर रहे हैं यानी कि दो देश अपनी-अपनी करेंसी में लेन-देन के लिए समझौता कर रहे हैं। इसके जरिए वे अपने विदेशी मुद्रा भंडार में भी विविधता ला रहे हैं यानी कि सिर्फ डॉलर की बजाय उनके विदेशी मुद्रा भंडार में कई देशों की करेंसी पर्याप्त मात्रा में होगी। यही डी-डॉलराइजेशन है और रुस के विदेशी मंत्री के मुताबिक यह तेजी पकड़ रहा है।

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