Wheat Farming Tips: किसान इस समय गेहूं बुआई के बाद पानी चलाने का काम कर रहे हैं। इसके बाद अब खाद की जरूरत होगी। गेहूं की बुवाई के बाद एक महीने तक पानी चलाने और खाद डालने का काम चलता है। समय पर पहली सिंचाई और खाद का छिड़काव फसल के लिए बेहद ही महत्वपूर्ण होता है। पहली सिंचाई को गेहूं के पौधों में कल्ले करने के लिए बेहद अहम मानी जाती है। एक्सपर्ट की मानें तो 21 से 25 दिनों के बीच हर हाल में गेहूं को पटा दें। ऐसा करने से गेहूं के पौधों में कल्ले तेजी से निकलने लगेंगे। यह ध्यान रहे कि खेत उतना ही पटाए कि खेत में पानी जमा ना हो। अगर पानी ज्यादा चल गया तो तत्काल जल निकासी का प्रबंध करें।
गेहूं बुवाई के एक महीने बाद खाद के अलावा अन्य पोषक तत्वों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। यूरिया के साथ-साथ ऑर्गेनिक खाद बायोविटा का भी किसान इस्तेमाल कर सकते हैं। बायोविटा गेहूं के पौधों की वृद्धि और विकास को बढ़ाने में मदद करता है। यह पौधों को मजबूत जड़ों, बेहतर फसल, और संपूर्ण फसल विकास को बढ़ावा देता है। साथ ही आवश्यक पोषक तत्व और जैविक उत्तेजन भी प्रदान करता है।
किसान एक एकड़ फसल के लिए 5 किलोग्राम बायोविटा 50 किलो यूरिया में मिलाकर छिड़काव कर सकते हैं। 'लोकल 18' को एक्सपर्ट ने बताया कि बायोवीटा में सल्फर, आयरन, मैग्नीशियम, मैंगनीज, कैल्शियम, कोबाल्ट और जिंक जैसे अहम पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसका इस्तेमाल करने से मिट्टी में पहले से मौजूद पोषक तत्व भी एक्टिव हो जाते हैं। इसके बाद गेहूं की फसल तेजी के साथ बढ़ती है। वहीं, कल्लों की संख्या भी तेजी से बढ़ती है।
इन्हें भी कर सकते हैं इस्तेमाल
अगर मार्केट में बायोविटा नहीं मिल रहा हो तो किसान यूरिया के साथ जिंक सल्फेट, फेरस सल्फेट और मैग्नीशियम सल्फेट का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए 500 ग्राम जिंक सल्फेट, 500 ग्राम फेरस सल्फेट और इतनी ही मात्रा में मैग्नीशियम सल्फेट का इस्तेमाल करें। तीनों ही पोषक तत्वों को 100 लीटर पानी में घोल बनाकर शाम के समय गेहूं की फसल पर छिड़काव कर दें। इससे गेहूं के पौधों में तेजी से बढ़ोतरी होगी।
ज्यादातर किसान गेहूं की फसलों में इफको की एनपीके 12-32-16 खाद का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, गेहूं की पैदावार के लिए इफको की डीएपी 18-46-0 खाद अधिक बेहतर और असरदार होता है। 12-32-16 खाद के मुकाबले डीएपी 18-46-0 खाद में नाइट्रोजन और फास्फोरस की मात्रा अधिक होती है। इससे फसलों की पैदावार अधिक होती है।