आयुष मंत्रालय (Ayush Ministry) ने गिलोय (Giloy) या गुडुची (टिनोस्पोरा कॉर्डिफोलिया) को लीवर खराब होने से जोड़ने वाली रिपोर्ट को बुधवार को खारिज करते हुए कहा कि यह सुरक्षित है और उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार लीवर पर इसका कोई जहरीला प्रभाव नहीं है। दरअसल, कोरोना काल के दौरान लोगों ने गिलोय या गुडुची का जबरदस्त इस्तेमाल किया था। इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए उपयोग किए गए कई उत्पादों में से गिलोय को सबसे बेहतर औषधि माना गया है।
हालांकि, हाल के दिनों में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में गिलोय/गुडुची का लीवर की खराबी से जोड़ा गया है। इन मीडियो रिपोर्टों को खारिज करते हुए आयुष मंत्रालय ने एक बार फिर यह दोहराया है कि गिलोय/गुडुची (टिनोस्पोरा कॉर्डिफोलिया) बेहद सुरक्षित औषधि है और उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इसका शरीर पर कोई जहरीला प्रभाव नहीं पड़ता है।
आयुष मंत्रालय ने कहा कि इस जड़ी-बूटी का उपयोग ट्रेडिशनल मेडिसिन सिस्टम में व्यापक थेराप्यूटिक ऍप्लिकेशन्स के लिए किया जाता है और यहां तक कि इसका उपयोग COVID-19 के मैनेजमेंट में भी किया जाता है। मंत्रालय ने आगे कहा कि समग्र स्वास्थ्य लाभों को ध्यान में रखते हुए, जड़ी बूटी को विषैला (toxic) होने का दावा नहीं किया जा सकता है।
बयान में आगे कहा गया है कि किसी दवा की सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि उसका उपयोग कैसे किया जा रहा है। सरकार ने कहा कि खुराक किसी विशेष दवा की सुरक्षा का निर्धारण करने वाले महत्वपूर्ण कारकों में से एक है।
मंत्रालय ने कहा कि औषधीय जड़ी बूटी का उपयोग एक योग्य डॉक्टर द्वारा निर्धारित औषधीय प्रभाव प्राप्त करने के लिए उचित खुराक में किया जाना चाहिए। मंत्रालय के अनुसार, गिलोय के कई औषधीय स्वास्थ्य लाभ हैं, क्योंकि यह विभिन्न विकारों का मुकाबला करता है।
गिलोय के कुछ गुण एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-हाइपरग्लाइसेमिक, एंटी-हाइपरलिपिडेमिक, हेपेटोप्रोटेक्टिव, कार्डियोवस्कुलर प्रोटेक्टिव, न्यूरोप्रोटेक्टिव, ऑस्टियोप्रोटेक्टिव, रेडियोप्रोटेक्टिव, एंटी-चिंता, एडाप्टोजेनिक, एनाल्जेसिक, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-पायरेटिक, एंटी-डायरियल, एंटी-अल्सर, एंटी-माइक्रोबियल और एंटी-कैंसर है।