Health Tips: नींद से जुड़ी शारीरिक और मानसिक समस्याएं दोनों सेहत के लिए हानिकारक होती हैं। बहुत से लोग हैं जो रात में नींद न पूरी होने की समस्या से जूझ रहे हैं। इससे डायबिटीज, हृदय रोग, चिंता-तनाव जैसा जोखिम बढ़ जाता है। लेकिन हम आपको बता दें कि कुछ बीमारी ऐसी भी हैं। जिसमें नींद न पूरी होने पर जान तक जा सकती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्लीप एपनिया (Sleep Apnea) भी एक ऐसी गंभीर बीमारी है। जिसे इग्नोर करने जान तक जा सकती है। लंबे समय तक इस बीमारी के बने रहने से कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
स्लीप एपनिया नींद से जुड़ी वो बीमारी है। जिसमें व्यक्ति की सोते हुए सांस बंद हो जाती है। इससे पीड़ित लोगों को कई बार खुद अपनी इस स्थिति का पता नहीं चल पाता है। जिससे इसका इलाज नहीं हो पाता है। ऐसे में लंबे समय तक इस बीमारी के रहने से स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
स्लीप एपनिया में सोते वक्त बार-बार सांस रुकती और चलती है। खतरनाक बात ये है कि इसमें नींद में ही सांस रुक जाती है और व्यक्ति को पता भी नहीं चलता है। कई बार झटके से सांस आती है और नींद टूट जाती है। इस बीमारी के शिकार लोगों के दिमाग में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। जिससे कई और समस्याएं पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है। इसमें खर्राटे लेना, नींद के दौरान सांस का बंद होना, नींद में मुंह सूखना, सुबह सिरदर्द रहना, सोने में कठिनाई, दिन में अत्यधिक नींद आना, जागते समय ध्यान देने में कठिनाई, चिड़चिड़ापन जैसे तमाम लक्षण नजर आते हैं।
किन लोगों में होता है स्ट्रोक का खतरा
स्ट्रोक का खतरा 55 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों में ज्यादा रहता है। इसके साथ ही स्लीप एपनिया, हाई बीपी, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, स्ट्रोक की फैमिली हिस्ट्री वाले लोगों में स्ट्रोक का जोखिम बाकि लोगों के मुकाबले ज्यादा रहता है।
स्लीप एपनिया भले ही एक गंभीर बीमारी है, लेकिन इसका इलाज संभव हैं। इसके इलाज में कई बार एक ऐसा माउथपीस लगाया जाता है। जिससे जबड़े पर दबाव पड़ता है। कई मामलों में सर्जरी की जाती है। कुछ इलाज के तरीके में एक ऐसे डिवाइस का यूज किया जाता है। जिससे सोते समय आपके वायुमार्ग खुला रह सकते हैं। अगर आपको नींद में सांस रुकने के जैसा या फिर दिनभर थकान और चिड़चिड़ापन रहता है तो आपको तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।