Independence Day 2023: 15 अगस्त 2023 यानि भारत का 77वां स्वतंत्रता दिवस। इस दिन नागरिक अपने घरों, ऑफिसों और जरूरी जगहों पर तिरंगा फहराते हैं इसलिए राष्ट्रीय ध्वज को फहराने से पहले कुछ नियमों को जानना आवश्यक हो जाता है। इस राष्ट्रीय दिवस पर भारतीय ध्वज संहिता 2002 के बारे में जरूर जान लीजिए। आखिर क्या है भारतीय ध्वज संहिता और इसके नियम-
तिरंगा का करें पूरा सम्मान
तिरंगा यानि भारत का राष्ट्रीय ध्वज - इसे फहराना, उपयोग और प्रदर्शन, राष्ट्रीय सम्मान-अपमान निवारण अधिनियम 1971 और भारतीय ध्वज संहिता 2002 द्वारा नियंत्रित होता है। भारतीय ध्वज संहिता 26 जनवरी 2002 से लागू की गई। 30 दिसंबर 2021 के आदेश के द्वारा भारतीय ध्वज संहिता 2002 में संशोधन किया गया। इसके बाद पॉलिएस्टर या मशीन से बने तिरंगे को भी अनुमति दे दी गई। अब राष्ट्रीय ध्वज हाथ से काते और बुने हुए या मशीन से बने कपास/पॉलिएस्टर/ऊन/खादी या रेशम से बना हो सकता है।
दिन-रात फहरा सकते हैं तिरंगा
भारतीय ध्वज संहिता 2002 को 19 जुलाई 2022 के आदेश के बाद संशोधित किया गया था। भारतीय ध्वज संहिता के भाग दो पैराग्राफ 2.2 के खंड (xi) को निम्नलिखित खंड द्वारा प्रतिस्थापित किया गया था जिसके मुताबिक झंडे को खुले में प्रदर्शित किया जा सकता है। इसके अलावा जनता के घर पर भी फहराया जा सकता है। सात ही इसे दिन-रात उड़ाया जा सकता है।
सभी सार्वजनिक, प्राइवेट ऑर्गेनाइजेशन और एजुकेशनल इंस्टीट्युट्स का कोई भी मेंबर राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा और सम्मान के अनुरूप इसे फहरा सकता है। सभी दिनों, खास अवसरों, औपचारिक या किसी और जरूरी अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज को फहराया या प्रदर्शित किया जा सकता है। इसके अलावा जब भी राष्ट्रीय ध्वज प्रदर्शित किया जाए तो उसे सम्मान के साथ फहराया जाना चाहिए।
राष्ट्रीय ध्वज आयताकार ही हो सकता है। झंडा किसी भी आकार का हो सकता है लेकिन इसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2 ही होना चाहिए। कटे-फटे और किसी भी प्रकार से क्षतिग्रस्त झंडे का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, ना ही उसे फहराया जाएगा। ध्वज संहिता के भाग III की धारा IX में साफतौर पर लिखा गया है कि गणमान्य व्यक्ति जैसे राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल आदि को छोड़कर कोई भी अपने वाहन पर झंडा नहीं फहरा सकता। झंडे को किसी भी अन्य झंडे या झंडों के साथ नहीं फहराना चाहिए और ना ही किसी अन्य झंडे के साथ रखना चाहिए। राष्ट्रीय ध्वज पर कुछ भी लिखा या छपा नहीं होना चाहिए। ध्वज केवल और केवल शोक के अवसर पर ही झुका हुआ रह सकता है।