देश में करोड़ों लोग रोजाना ट्रेन से सफर करते हैं। कम किराए में आरामदायक सफर का मजा भारतीय रेलवे में ही आता है। हालांकि कभी-कभी ऐसा होता है कि यात्री अपना सामान ट्रेन में ही भूल जाते है। कभी-कभी उनका सामान खो जाता है। अगर ऐसी घटना किसी के साथ होती है तो उसे टेंशन होने लगता है। लेकिन अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। भारत में एक ऐसा रेलवे स्टेशन है, जहां चार्जर से लेकर सूटकेश या अन्य कोई भी सामान यात्रियों तक पहुंचाया जाता है। कुल मिलाकर इस स्टेशन से खोए हुए सामान के मिलने की पूरी गारंटी है। यह स्टेशन देश की राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली है।
दरअसल, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के सुपरिटेंडेंट राकेश शर्मा ट्रेनों के ऑपरेशन के साथ-साथ अपने आप में खोया पाया विभाग भी हैं। स्टेशन या ट्रेन में मिले सामान को उसके मालिक तक सुरक्षित तरीके से पहुंचाया जाता है। हाल ही में भारतीय रेलवे ने उनको इस काम के लिए आवार्ड भी दिया है। शर्मा छूटा सामान पहुंचाने की ‘गारंटी’ तक लेते हैं। बशर्ते वह सामान उनके पास तक पहुंच जाए।
3 करोड़ रुपये का सामान हो चुका वापस
नई दिल्ली स्टेशन के सुपरिटेंडेंट राकेश शर्मा का काम स्टेशन से ट्रेनों के ऑपरेशन कामकाज देखना है। यहां पर रोजाना करीब 350 ट्रेनें गुजरती हैं। 6 लाख यात्रियों का आना-जाना रहता है। वे अपने काम को बाखूबी निभाते हैं। इसके साथ ही, निजी रूप में खोया पाया विभाग भी चलाते हैं। यानी स्टेशन या ट्रेन में छूटे सामान के मालिक को ढूढ़कर पहुंचाते हैं। वो अब तक 1148 सामान को मालिक तक पहुंचा चुके हैं। इसकी अनुमानित कीमत करीब तीन करोड़ रुपये हैं। इसमें चार्जर जैसे छोटे सामान से लेकर ज्वैलरी जैसी महंगी चीजें भी शामिल है। खास बात यह है सामान को विदेश में रहने वाले उसके मालिक तक पहुंचाया गया है। अब तक 15 देशों के नागरिकों को सामान वापस दिया जा चुका है।
32 विदेशी नागरिकों का सामान वापस
शर्मा ने बताया कि अब तक 15 देशों के 32 नागरिकों का सामान वापस कर चुके हैं। इनमें अमेरिका, इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी, इटली, यूएई जैसे प्रमुख देश शामिल हैं। सबसे ज्यादा सामान इंग्लैंड के 8 लोगों का और दूसरे नंबर पर अमेरिका के 7 लोगों का छूटा सामान वापस किया गया है।
विदेशी नागरिकों को कैसे सामान मिलता है वापस?
शर्मा ने बताया कि जब किस विदेशी नागरिक का सामान ट्रेन या स्टेशन में छूट जाता है। तब सबसे पहले संबंधित व्यक्ति संपर्क करने की कोशिश की जाती है। अगर उसका कोई परिचित है तो उसको सामान देते हैं। अगर यहां कोई जानने वाला नहीं है तो संबंधित देश की एंबेसी में संपर्क कर सामान पहुंचा दिया जाता है। कई बार तो उन्होंने अपने खर्च से भी सामान को विदेश भेजा है।
साल 2016 में शुरू हुआ यह मिशन
राकेश शर्मा ने बताया कि इस काम की शुरुआत साल 2016 से की थी। पहले भी उन यात्रियों की मदद करते थे, जिनका ट्रेन में पर्स या बैग चोरी हो जाता था। उनके पास किराए के पैसे नहीं होते थे। ऐसे यात्रियों की मदद के लिए वो हर महीने माह सैलरी से कुछ रुपये निकाल कर अलग रख लेते थे। परेशान यात्रियों को टिकट खरीदकर उसे गतंव्य तक पहुंचाते थे। इसके साथ ही उन्हें लगा कि क्यों न यात्रियों का जो सामान ट्रेन या स्टेशन में छूट जाता है। उसको मालिक तक पहुंचाया जाए। इसके साथ शुरू हुआ कांरवा आज तक चल रहा है।