Lakshadweep: ...तो भारत का हिस्सा नहीं होता लक्षद्वीप, जानें कैसे सरदार पटेल ने पाकिस्तान के कब्जे वाले प्लान को किया था फेल

History of Lakshadweep: CNN-न्यूज18 से बात करते हुए लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि पीएम मोदी की यात्रा के बाद आईलैंड्स का भाग्य बदल गया। लक्षद्वीप प्रशासन को आने वाले दिनों में लगभग 20,000 करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद है, जो इसे मालदीव के बराबर लाएगा

अपडेटेड Jan 09, 2024 पर 7:58 PM
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Lakshadweep VS Maldives: पाकिस्तान का हो जाता लक्षद्वीप, अगर सरदार पटेल ने जिन्ना के प्लान को नहीं किया होता फेल

Story of Lakshadweep: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारत के सबसे छोटे केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप की यात्रा के बाद यह आईलैंड्स भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। लक्षद्वीप को लेकर भारत और मालदीव (India-Maldives Diplomatic Row) के बीच एक राजनयिक विवाद भी छिड़ गया है। लक्षद्वीप दौरे को लेकर भारत और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ कुछ मंत्रियों की तरफ से विवादित टिप्पणी करना मालदीव को भारी पड़ता नजर आ रहा है। भारत की कड़ी आपत्ति के बाद मालदीव ने पीएम मोदी के खिलाफ विवादित बयान देने वाले तीन मंत्रियों को निलंबित कर दिया है। हालांकि, इसके बावजूद दोनों देशों के बीच विवाद थमता नहीं दिख रहा है।

CNN-न्यूज18 से बात करते हुए लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि पीएम मोदी की यात्रा के बाद आईलैंड्स का भाग्य बदल गया। लक्षद्वीप प्रशासन को आने वाले दिनों में लगभग 20,000 करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद है, जो इसे मालदीव के बराबर लाएगा। इतना ही नहीं, पीएम के दौरे के बाद लक्षद्वीप लगातार Google पर सबसे अधिक सर्च किए जाने वाला भारतीय स्थान बना हुआ है।

लक्षद्वीप का इतिहास (History of Lakshadweep)


पीएम मोदी ने अक्टूबर 2019 में 'मन की बात' में बताया था कि कैसे भारत के 'लौह पुरुष' ने न केवल हैदराबाद और जूनागढ़ जैसी बिखरी हुई प्रमुख रियासतों को एकजुट किया बल्कि लक्षद्वीप को भी पाकिस्तान से बचाया। पहले भारतीय गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल न होते तो इस भारतीय आईलैंड्स को पाकिस्तान द्वारा जीत ली गई होती। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सरदार पटेल के योगदान ने ब्रिटिशोत्तर भारत को आकार देने में मदद की।

दरअसल, साल 1947 के विभाजन के बाद पाकिस्तान इस खूबसूरत द्वीप समूह पर कब्जा करना चाहता था। तभी सरदार पटेल ने कुछ ऐसा किया कि लक्षद्वीप पाकिस्तान के हाथ से फिसल गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि 93 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाले लक्षद्वीप पर मुस्लिम लीग के प्रमुख मोहम्मद अली जिन्ना की नजर थी, जिन्होंने पाकिस्तान की स्थापना की थी। हैदराबाद, जूनागढ़, कश्मीर, त्रावणकोर जैसे भारतीय राज्य पाकिस्तान के हिस्से में आने थे।

हालांकि, सरदार वल्लभ भाई पटेल के कुशन नेतृत्व ने ऐसा नहीं होने दिया। लेकिन, इसी बीच कोच्चि से 496 किलोमीटर दूर बसा द्वीप समूह बंटवारे से अछूता रह गया। जिन्ना बंटवारे के बाद इस खूबसूरत द्वीप समूह पर कब्जा करना चाहते थे। लेकिन सरदार पटेल की तत्परता की वजह से लक्षद्वीप भारत का ही हिस्सा बना रहा। उन्होंने देश के अन्य नायकों के साथ मिलकर पाकिस्तान का प्लान फेल कर दिया।

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लक्षद्वीप द्वीप समूह दक्षिणी भारत के मालाबार तट के करीब है। रिपोर्टों के अनुसार, सरदार पटेल ने लक्षद्वीप द्वीपों के रणनीतिक महत्व को समझा और दक्षिणी भारत के अधिकारियों से द्वीपों पर सुरक्षा सैनिकों के साथ एक जहाज तेजी से भेजने का आग्रह किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने लक्षद्वीप पर कब्जा करने के लिए एक जहाज भी तैनात कर दिया था। हालांकि, सरदार पटेल के आदेश के बाद, लक्षद्वीप में तुरंत भारतीय तिरंगा फहरा दिया गया। इसके बाद पाकिस्तानी जहाज को बंदरगाह पर लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा।

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