कुंभ पर्व भारत का ही नहीं बल्कि दुनिया का सबसे प्राचीन मेला है। यह वैदिक ज्योतिष की गणितीय गणना के आधार पर लगता है। जिसकी अपनी अलग धार्मिक और वैज्ञानिक महत्ता है। आज का विज्ञान कहता है कि बृहस्पति को सूर्य की परिक्रमा करने में 12 साल लगते हैं। ये बाते हमारे ऋषियों को बहुत पहले से पता है कि कुंभ का समय बृहस्पति ग्रह की गति पर ही निर्भर है। इस बार महाकुंभ मेले की शुरुआत 13 जनवरी 2025 से हो रही है। इस बार मेला घूमने के लिए श्रद्धालुओं को गाइड की सुविधा भी मिलेगी। श्रद्धालुओं के लिए डिजिटल सुविधाएं भी मुहैया कराई जा रही हैं।
