कथावचक इंद्रदेव महाराज ने काशी के विद्वानों से मांगी क्षमा, कर दी थी अमर्यादित टिप्पणी

Mahamandleshwar of Vrindavan: वृंदावन में महामंडलेश्वर स्वामी इंद्रदेव महाराज आमतौर पर सुर्खियों में बने रहे हैं। वो सनातन धर्म को लेकर कई बार ऐसी बातें कह चुके हैं। जिससे साधु संत नाराज हो जाते हैं। ऐसे ही उन्होंने हाल ही में सनातन धर्म में श्राद्ध कर्म को काल्पनिक बताया था। इसके बाद पूरे देश में बवाल शुरू हो गया है। काशी के विद्वानों ने कड़ी आपत्ति जताई थी

अपडेटेड Aug 12, 2024 पर 10:44 AM
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Mahamandleshwar of Vrindavan: कथावाचक इंद्रदेव महाराज ने कहा कि उनके बयानों को तोड़ मरोड़कर पेश किया गया है।

वृंदावन में महामंडलेश्वर स्वामी इंद्रदेव महाराज फिर से सुर्खियों में आ गए हैं। आमतौर पर वो सनातन धर्म के बारे में कई अमर्यादित टिप्पणी कर चुके हैं। इससे पूरे देश में बवाल मच जाता है। कभी रामलीला को लेकर तो कभी अन्य मुद्दों पर कई बार बयान दे चुके हैं। इस बीच उनका एक वीडियो सोशल मीडिय में वायरल हो रहा थआ, जिसमें उन्होंने सनातन धर्म में श्राद्ध कर्म पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस पर काशी के विद्वानों ने नाराजगी जताई थी। हालांकि इंद्रदेव महाराज काशी आए और साधु, संतों, विद्वानों से अपन बयान पर क्षमा मांगी।

इंद्रदेव महाराज ने कहा कि मेरा कथन ऐसा नहीं था, मेरे पुराने बयान को काट-छांट कर इंटरनेट में प्रसारित किया गया। अगर मेरे बयान से सनातन धर्म के विद्वानों ,सधु संतों को ठेस पहुंची है तो मैं क्षमा का प्रार्थी हूं। मेरा पूरा जीवन सनातन धर्म के लिए समर्पित है।

श्राद्ध कर्म के बारे में दिया थ यह बयान


उत्तर प्रदेश के मथुरा में वृंदावन के श्री राधा किशोरी धाम से निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी इंद्रदेव महाराज वाराणसी (काशी) गए। यहां उन्होंने साधु-संतों से क्षमा मांगी। दरअसल, इंद्रदेव महाराज एक वीडियो में मुंडन को अशास्त्रीय और श्राद्धकर्म को काल्पनिक बताते हुए नजर आए थे। इस पर काशी के संतों ने नाराजगी जताई थी। इतना ही नहीं साधु संतों ने इंद्रदेव महाराज की 13 अगस्त से 19 अगस्त तक महमूरगंज स्थिति शगुन लॉन में होने वाली शिव महापुराण कथा नहीं करने की चेतावनी दी थी। इंद्रदेव महाराज ने साधु संतों के सामने अपने पुराने वीडियो के सबूत दिए और कहा कि काट-छांट कर पेश किया गया है।

ब्यासपीठ की गरिमा बनाए रखना बेहद जरूरी

अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने कहा कि देश के सभी संतों और कथा वाचकों से अपील करता हूं कि वे सभी लोग अपनी व्यासपीठ की गरिमा को बनाए रखें। इसके साथ ही काशी विद्वत परिषद के प्रो, रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि हिंदू संस्कृति का मुख्य संस्कार श्राद्ध कर्म है। सभी हिंदू इसे सबसे अच्छा संस्कार मानते हैं। इसके बारे में अनर्गल बातें नहीं करना चाहिए।

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