Metabolism: कुछ लोग जमकर खाते हैं लेकिन फिर भी उनका वजन नहीं बढ़ता है। वहीं कुछ लोग हेल्दी डाइट लेते हैं, कम खाते हैं और एक्सरसाइज भी करते हैं। इसके बावजूद उनका वजन कम होने का नाम नहीं लेता है। इन सबका का कारण सिर्फ मेटाबॉलिज्म (Metabolism) है। अगर मेटाबॉलिज्म स्लो है तो फैट कम करने में कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। आपका वजन कम या ज्यादा होना मेटाबॉलिज्म पर निर्भर करता है। मेटाबॉलिज्म शरीर को एनर्जी देता है। इसका काम खाने को एनर्जी में बदलना है। खराब लाइफस्टाइल की वजह से मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है। जिससे पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं बढ़ने लगती हैं।
एक्टिव मेटाबॉलिज्म वजन घटाने में मदद करता है। इसकी वजह ये है कि ये कैलोरी को बर्न करने में मदद करता है। ये ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, ट्राईग्लिसराइड और ब्लड प्रेशन को मैनेज करता है। आइये जानते हैं वजन और मेटाबॉलिज्म के बीच क्या है कनेक्शन और कैसे इसे बढ़ाएं।
जानिए क्या है मेटाबॉलिज्म?
मेटाबॉलिज्म एक प्रॉसेस है, जो भोजन को एनर्जी में कनवर्ट (परिवर्तित) करता है। इसके जरिए कैलोरी एनर्जी या फैट में बदलती है। मेटाबॉलिज्म 24 घंटे की प्रक्रिया है। यह 2 तरह का होता है। बेसल मेटाबॉलिक रेट और रेस्टिंग मेटाबॉलिक रेट। शरीर में 24 घंटे में मेटाबॉलिज्म कम या ज्यादा होता रहता है। जैसे सुबह के समय मेटाबॉलिज्म एकदम हाई रहता है। वहीं रात में ये कम हो जाता है। अगर शरीर का मेटाबॉलिज्म ठीक नहीं रहेगा तो थकान, हाई कलेस्ट्रॉल, मांसपेशियों में कमजोरी, ड्राई स्किन, वजन बढ़ना, जोड़ों में सूजन, भारी मासिक धर्म, डिप्रेशन और दिल धड़कने की धीमी गति जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में अपने शरीर के मेटाबॉलिज्म को सही बनाए रखने के लिए आपको इन चीजों का सेवन करना चाहिए...
बहुत से लोगों को यह गलतफहमी होती है कि कम कैलोरी खाने से उन्हें वजन कम करने में मदद मिलेगी। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि कैलोरी की मात्रा को जरूरत से ज्यादा सीमित करने से मेटाबॉलिज्म कम हो सकता है। हालांकि वजन कम करने के लिए आपको अपना कैलोरी इंटके कम करना पड़ सकता है, लेकिन बहुत कम कैलोरी खाने से उलटा असर पड़ सकता है।
प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों का करें सेवन
प्रोटीन रिच फूड बॉडी के मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है। दूध, चीज और अन्य डेयरी प्रॉडक्ट के साथ-साथ अंडा, चिकन, फिश, सीफूड और मीट मेटाबॉलिज्म को बढ़ाते हैं। प्रोटीन फैट को मांसपेशियों में बदलकर मजबूत बनाता है इसलिए इससे वेट कंट्रोल भी रहता है।
मूंग,मसूर,चना,बींस,मूंगफली में बाकी फूड प्लांट्स के मुकाबले ज्यादा प्रोटीन पाया जाता है। फलियों में आहार संबंधी फाइबर होते हैं। जिससे डाइजेशन सही होता है। यह फैट को ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल करता है। ब्लड शुगर के स्तर को सामान्य रखता है।
हरी सब्जियों में जिंक,आयरन,और सिलेनियम पाया जाता है। यह थायरॉइड ग्लैंड के लिए काफी अच्छा होता है। पालक समेत और भी कई साग हैं जो बॉडी में मेटाबॉलिज्म के स्तर को बढ़ाते हैं।
ग्रीन टी में कई एंटीऑक्सिडेंट जैसे कैटीचिन और पॉलीफेनल मौजूद होता है। इससे मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने में मदद मिलती है। शरीर से टॉक्सिन बाहर निकलने लगते हैं। ग्रीन टी पीने से एक दिन में 100 कैलरी बर्न होती है।