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शरीर में तेजी से पहुंच रही है माइक्रो प्लास्टिक, आखिर कहां से हो रही है एंट्री, रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा

Micro Plastic: आज कल की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में सेहत ध्यान रखना बिल्कुल खत्म हो गया है। शायद यही वजह है कि शरीर में माइक्रो प्लास्टिक को एंट्री आसानी से मिल रही है। एक स्टडी में कहा गया है कि प्लास्टिक में करीब 10,000 तरह के केमिकल पूरी दुनिया में बिना रोकटोक मिलाए जा रहे हैं। चीन सबसे ज्यादा प्लास्टिक प्रदूषण फैला रहा है

Jitendra Singhअपडेटेड Sep 29, 2024 पर 5:01 PM
शरीर में तेजी से पहुंच रही है माइक्रो प्लास्टिक, आखिर कहां से हो रही है एंट्री, रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा
Micro Plastic: रिसर्च में पता चला है कि हमारे शरीर के हर भाग में माइक्रोप्लास्टिक के कण हैं।

माइक्रोप्लास्टिक पर एक रिसर्च से बड़ा खुलासा हुआ है। इसमें माइक्रोप्लास्टिक पर करीब 7000 स्टडीज पर एक विश्लेषण किया गया है। साइंस मैगजीन के मुताबिक एक रिसर्च पेपर से पता चला है कि 20 सालों से धीरे-धीरे माइक्रोप्लास्टिक जंगली जानवरों में और लोगों के शरीर में कई कण की मौजूदगी पाई गई है। माइक्रोप्लास्टिक बड़े पैमाने पर फैले हुए हैं। इस स्टडी से पता चला है कि माइक्रोप्लास्टिक खान-पान के जरिए शरीर के अंदर आसानी से आ रही है। माइक्रो प्लास्टिक के कण शरीर में तेजी से बढ़ रहे हैं। सेहत के लिए यह किसी टाइम-बम की तरह बन चुके है। यह जानलेवा साबित हो सकता है।

प्लास्टिक में करीब 10,000 तरह के केमिकल पूरी दुनिया में बिना रोकटोक मिलाए जा रहे हैं। चीन सबसे ज्यादा प्लास्टिक प्रदूषण फैला रहा है। इसके बाद इंडोनेशिया है। मानव शरीर में माइक्रो-प्लास्टिक पहुंचाने का सबसे बड़ा जरिया समुद्री मछलियां बन चुकी हैं। अनुमान है कि 2050 तक समुद्र में पहुंचे प्लास्टिक का वजन मछलियों के कुल वजन से ज्यादा होगा।

जानिए क्या है माइक्रो प्लास्टिक

प्लास्टिक के बहुत छोटे टुकड़ों को माइक्रोप्लास्टिक कहा जाता है। इनकी लंबाई 5 मिलीमीटर या उससे कम होती है। 5 मिलीमीटर से छोटे 12 से लेकर 1 लाख तक प्लास्टिक कण रोजाना शरीर में पहुंच रहे हैं। एक साल में 11,845 से 1,93,200 माइक्रो प्लास्टिक कण शरीर में पहुंचते हैं। इनका वजन 7.7 ग्राम से 287 ग्राम तक होता है।

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