Monkeypox: कोरोना वायरस के आने के बाद अब भारत में मंकीपॉक्स (Monkeypox) ने लोगों की चिंताएं बढ़ा दी है। दुनिया के 70 से ज्यादा देशों में फैल चुके मंकीपॉक्स वायरस की भारत में एंट्री हो गई है। केरल के कोल्लम जिले से मंकीपॉक्स का पहला मामला सामने आया है।
केरल में मिला शख्स संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से लौटा था। केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने कहा कि विदेश से राज्य में लौटे एक 35 वर्षीय एक व्यक्ति में मंकीपॉक्स के लक्षण दिखने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच में व्यक्ति में मंकीपॉक्स संक्रमण की पुष्टि हुई है।
केंद्र ने भेजी उच्च स्तरीय टीम
देश में मंकीपॉक्स का पहला मामला सामने आने के मद्देनजर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्थिति से निपटने में अधिकारियों का सहयोग करने के लिए गुरुवार को राज्य में एक उच्च स्तरीय टीम भेजी है। केरल भेजी गई केंद्रीय टीम में राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी), राम मनोहर लोहिया अस्पताल, नई दिल्ली के विशेषज्ञों और स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ क्षेत्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण कार्यालय, केरल के विशेषज्ञ शामिल हैं।
ICMR ने 15 लैब को टेस्टिंग के लिए किया तैयार
कोविड-19 के बीच मंकीपॉक्स वायरस की दस्तक से केंद्र सरकार अलर्ट हो गई है। केंद्र ने सभी राज्यों से कहा कि सभी संदिग्ध मामलों की जांच हो, टेस्ट किए जाएं और अस्पतालों में निगरानी बढ़ाई जाए। केंद्र ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) को अलर्ट कर दिया है।
सरकार ने ICMR को मंकीपॉक्स की स्थिति पर करीब से नजर रखने के लिए कहा है। साथ ही मंकीपॉक्स के लक्षणों वाले ट्रैवलर्स के सैंपल तुरंत पुणे की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) में जांच के लिए भेजने को भी कहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ICMR ने 15 लैब को टेस्टिंग के लिए तैयार किया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार मंकीपॉक्स वायरल जूनोसिस है (जानवरों से इंसानों में प्रसारित होने वाला वायरस), जिसमें चेचक के समान लक्षण होते हैं। यह बीमारी चूहों या बंदरों जैसे संक्रमित जीवों से मनुष्य में फैलती है।
ब्रिटेन के स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया है कि संक्रमित व्यक्ति हाल में नाइजीरिया से आया है। ऐसे में आशंका है कि मरीज को मंकीपॉक्स का संक्रमण उसी देश में हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, मंकीपॉक्स का पहला मामला इंसानों में साल 1970 में सामने आया था।
जानवरों से इंसानों में फैसला है वायरस
यह वायरस जंगली जानवरों में उत्पन्न होता है और फिर इंसालों में फैलता है। संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने से मंकीपॉक्स वायरस का खतरा बढ़ जाता है। यह एक दुर्लभ वायरस है जो स्मॉल पॉक्स की तरह दिखता है। इस बीमारी में चेचक के लक्षण दिखाई देते हैं। इसके अलावा इस संक्रामक बीमारी में फ्लू जैसे लक्षण भी मरीज में दिखाई दे सकते हैं।
जो मंकीपॉक्स के शिकार हैं, उनमें निमोनिया के लक्षण भी देखने को मिलते हैं। इससे संक्रमित होने पर मरीज में दिखाई देने वाले लक्षण हल्के या गंभीर हो सकते हैं। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद यह बीमारी आंख, नाक या मुंह के जरिए इंसान के शरीर में फैल सकती है।
मंकीपॉक्स के लक्षणों की बात करें तो मरीज के चेहरे और शरीर पर लाल रंग के दानें और रैशेज दिखाई दे सकते हैं। इसके अलावा बुखार, मांसपेशियों में दर्द, तेज सिरदर्द, त्वचा पर चकत्ते या घाव, शरीर में ऊर्जी की कमी होना, स्किन पर लाल रंग के रैशेज, निमोनिया के लक्षण, ठंड लगना, अत्यधिक थकान, लिम्फ नोड्स में सूजन और पीठ दर्द शामिल हैं। WHO ने कहा है कि हाल के मामलों में मृत्यु दर 3 से 6 प्रतिशत के बीच रही है।
WHO ने एक बयान में कहा है कि यदि आपको लगता है कि आपके अंदर ऐसे लक्षण हैं जो मंकीपॉक्स हो सकते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। उन्हें बताएं कि क्या आपने किसी ऐसे व्यक्ति के साथ संपर्क किया है, जिसे मंकीपॉक्स का संदेह या पुष्टि हुई है। संक्रमित व्यक्ति को आइसोलेशन में रखने से अन्य लोगों में इसके फैलने का खतरा कम हो जाता है। इसके अलावा सार्वजानिक जगहों पर फेस मास्क का इस्तेमाल, साफ-सफाई का ध्यान रखने की भी सलाह दी जाती है।