Moonlighting : संपर्क फाउंडेशन के फाउंडेशन और चेयरमैन और एचसीएल टेक (HCLTech) के पूर्व सीईओ विनीत नायर (Vineet Nayar) ने कहा कि मूनलाइटिंग जरूरी है और भारतीय आईटी सर्विसेज कंपनियों द्वारा इससे निपटने के प्रयासों के बावजूद कम वेतन और इनोवेशन के लिए अवसरों की कमी के चलते हालात बिगड़ गए हैं।
विनीत नायर ने कहा कि भारत में आंत्रप्रेन्योरशिप के कल्चर और स्टार्टअप्स की संख्या में बढ़ोतरी के साथ, मूनलाइटिंग को पूरी तरह खत्म करना असंभव होगा। उन्होंने कहा कि ज्यादातर स्टार्टअप्स और कई आईटी कंपनियों ने फुलटाइम काम करते हुए इसका समर्थन करना शुरू कर दिया है।
क्यों बढ़ा मूनलाइटिंग का चलन
एक कंपनी में फुल टाइम काम करते हुए, गोपनीय तरीके से दूसरी जॉब करने को Moonlighting कहा जाता है। महामारी के चलते बीते दो साल में आईटी वर्कर्स के लिए घर से काम करना संभव हुआ है। नतीजतन, आईटी वर्कर्स ने फ्रीलांस और साइड जॉब करनी शुरू कर दीं। हालांकि, ऐसे कुछ मामलों में क्लाइंट डेटा को लेकर रिस्क पैदा हो गया।
मूनलाइटिंग पर रोक संभव नहीं
इंटरनेट क्रांति का जिक्र करते हुए नायर ने मनीकंट्रोल से बातचीत में कहा, जब इंटरनेट हमारे जीवन में आया तो हमने विरोध करते हुए कहा कि हमारा डेटा चोरी हो जाएगा। लेकिन यह हमारे डेस्कटॉप, मोबाइल फोन और यहां तक वाचेस तक आ गया। चूंकि, लोग इसे रोक नहीं सके, इसलिए उन्होंने उसे कोसने की बजाय इसके इस्तेमाल को सीखा।
इन तीन वजहों से बढ़ी मूनलाइटिंग
विनीत नायर ने कहा, ऐसे ही Moonlighting को भी रोका नहीं जा सकता। आप इसका विरोध तो कर सकते हैं लेकिन रोक नहीं सकते। आपको इसके पीछे की वजह समझने की जरूरत है। नायर के मुताबिक, आईटी सेक्टर में मूनलाइटिंग के पांव पसारने की तीन वजह हैं- फ्रेशर्स और टॉप मैनेजमेंट के बीच सैलरी में अंतर, आईटी कंपनियों के प्रॉफिट आधारित कल्चर में उद्देश्य और इनोवेशन की कमी और स्टार्टअप इकोनॉमी का विकास।