5G के जमाने में न बिजली न ही मोबाइल फोन, टेक्नोलॉजी से है कोसों दूर, भारतीय संस्कृति के भरोसे है मस्त लाइफ

Village Lives Without Electricity: कुर्मा गांव के लोग बिना बिजली, गैस और आधुनिक सुविधाओं के खुशहाल जीवन जी रहे हैं। यहां के घर चूने और मिट्टी से बनाए जाते हैं, जिन्हें पारंपरिक तरीके से सजाए जाते हैं। लोग गाय के गोबर से घर लीपते हैं। इसके साथ ही अपने कपड़े खुद बनाते हैं, अपनी पुरानी संस्कृति और परंपराओं को निभाते हैं

अपडेटेड Dec 19, 2024 पर 5:34 PM
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Village Lives Without Electricity: 21वीं सदी के जमाने में भारत में एक ऐसा गांव में जहां आज भी लोग बिना बिजली के रहते हैं।

आज की तकनीक इतनी तेज़ हो गई है कि हम 5G जैसी तकनीकों तक पहुंच चुके हैं। समय के साथ भारत ने बहुत तरक्की की है, लेकिन इस तरक्की के साथ लोगों को सुविधाओं की आदत भी लग गई है। अब ज्यादातर लोग हर छोटी से छोटी सुविधा की उम्मीद करते हैं, और इसके बिना जीवन की कल्पना करना मुश्किल लगता है। खासकर बिजली के बिना जीवन की कल्पना करना असंभव सा लगता है। लोग अब इस आदत के इतने आदी हो चुके हैं कि बिना बिजली के घरों में रहना और काम करना कठिन लगता है। लेकिन फिर भी कुछ जगहें ऐसी हैं, जहां लोग आज भी इन आधुनिक सुविधाओं से दूर हैं।

ऐसा ही एक गांव है, जहां के लोग बिजली, गैस, और अन्य आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल नहीं करते। यहां के लोग पुराने तरीके से जीवन जीते हैं, और अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को बनाए रखते हैं।

बिना बिजली के जीवन की सादगी


आंध्र प्रदेश के कुर्मा गांव के लोग बिना बिजली के अपना जीवन जीते हैं। यहां न तो बिजली की सप्लाई है, न ही गैस या पंखे का उपयोग होता है।  यहां के लोग इस तरह की आधुनिक सुविधाओं के बिना पूरी तरह से खुशहाल जीवन जी रहे हैं। उनका मानना है कि पुरानी संस्कृति और परंपराओं में ही जीवन की असली खुशी और संतुलन है। यहां के लोग अपनी जरूरतों के लिए किसी भी तरह के आधुनिक उपकरणों का सहारा नहीं लेते हैं।

खास घरों की बनावट

कुर्मा गांव के घरों की बनावट भी बेहद खास है। यहां के लोग अपने घरों का निर्माण चूने और मिट्टी से करते हैं। घरों की सजावट के लिए भी केवल मिट्टी का ही उपयोग किया जाता है। मिट्टी से घर की दीवारों को लीपा जाता है और चूने से रंगीन किया जाता है, जिससे इन घरों में एक अलग ही सौंदर्य और ताजगी बनी रहती है।

 सादगी और अनोखी आदतें

गांव में प्रवेश करते ही सबसे पहले एक बड़ा हॉल दिखाई देता है, जिसके बगल में एक एक तालाब होता है। घर में पानी की आपूर्ति के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। हॉल के दूसरी ओर रसोईघर है, जहां लकड़ी के चूल्हों पर खाना पकाया जाता है। यहां की रसोई में गैस या इलेक्ट्रिक चूल्हे का नामो-निशान नहीं है। घर में लकड़ी की बनी छोटी अलमारियों में लोग अपना जरूरी सामान रखते हैं। बैक्टीरिया से बचने के लिए घर को गाय के गोबर से लीपा जाता है, क्योंकि यहां के लोग मानते हैं कि गोबर से घर साफ और बैक्टीरिया मुक्त रहता है।

पारंपरिक कपड़े और जीवनशैली

कुर्मा गांव के लोग खुद ही अपने कपड़े बनाते हैं और सिलाई करने में भी पारंगत हैं। यह गांव आज भी पूरी तरह से परंपराओं के साथ जीने की मिसाल पेश करता है। जहां लोग अपनी संस्कृति और रीति-रिवाजों को आज भी उतनी ही श्रद्धा से निभाते हैं। यह गांव हमें सिखाता है कि जीवन में अत्याधुनिक तकनीक और सुविधाएं जरूरी नहीं हैं। सादगी और परंपरा में भी बहुत कुछ है। यहां के लोग यह साबित कर रहे हैं कि यदि मन में संतोष और सरलता हो, तो बिना बिजली, गैस और आधुनिक सुविधाओं के भी एक खुशहाल  जीवन जी सकते हैं।

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