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नेवी की स्पीडबोट से सागर की छाती पर हुआ बड़ा हादसा, आखिर ऐसी बोट की कितनी रहती है स्पीड? जानें पूरी डिटेल

Mumbai Boat Accident: मुंबई में गेटवे ऑफ इंडिया से एलीफेंटा के बीच चलने वाली एक फेरी को नेवी की स्पीड बोट ने टक्कर मार दी थी। नीलकमल नान की नाव को नेवी की स्पीडबोट ने टक्कर मारी है। इस बीच चर्चा तेज हो गई है कि आखिर नेवी नाव की स्पीड कितनी रही होगी, जिससे टक्कर हुई है

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 19, 2024 पर 5:03 PM
नेवी की स्पीडबोट से सागर की छाती पर हुआ बड़ा हादसा, आखिर ऐसी बोट की कितनी रहती है स्पीड? जानें पूरी डिटेल
Mumbai Boat Accident: आमतौर पर नेवी के नाव की स्पीड 110 किमी प्रति घंटे जा सकती है।

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में गेट ऑफ इंडिया के पास दर्दनाक हादसा हुआ था। यात्रियों को लेकर एलीफेंटा की ओर जा रही ‘नीलकमल’ नाव को नेवी की स्पीट बोट ने टक्कर मार दी थी। हादसे में अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 101 को बचा लिया गया है। अभी भी नौसेना का रेस्क्यू ऑपरेशन समुद्र में चलाया जा रहा है। अभी कितने यात्री लापता हैं, इसकी कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। इस हादसे के बाद चर्चा तेज हो गई है कि आखिर नेवी के स्पीड बोट की रफ्तार कितनी रहती है। आखिर किस रफ्तार से यह टक्कर हुई होगी।

दरअसल, जिस नाव से हादसा हुआ है, उस नाव का इस्तेमाल नेवी के जवान गश्त के दौरान करते हैं। इसी नाव से जवान जल सीमा की रक्षा करते हैं। नेवी के जवानों को दुश्मनों को देखते ही इसी नाव से सामना करना होता है। इसी नाव के जरिए दुश्मनों को खदेड़ते हैं। लेकिन इस नाव ने ही 13 लोगों की जिंदगी खत्म कर दी।

नेवी बोट की कितनी होती है स्पीड?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेवी में कई तरह की स्पीड बोट इस्तेमाल की जाती है। उनकी बनावट और प्रदर्शन के आधार पर हर एक नाव की स्पीड अलग-अलग होती है। आमतौर पर ऐसी नावों की स्पीड 35 से 60 समुद्री मील प्रति घंटे (65 और 110 किमी/घंटा) के बीच होती है। इस गति से वे बड़े महासागरों में तेजी से आगे बढ़ सकती हैं। वहीं कुछ नावों की स्पीड 80 समुद्री मील (148 किमी/घंटा) तक होती है। ऐसी नावों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर किया जाता है। ये नावें हल्की लेकिन मजबूत सामानों से बनाई जाती है। इसके साथ ही इन नावों में आधुनिक इंजन का इस्तेमाल किया जाता है। नेवी की नावों में दो या तीन इंजन का इस्तेमाल किया जाता है। जिससे नाव की स्पीड में इजाफा होता है। इसके अलावा इन नावों की डिजाइन हाइड्रोडायनमिक होती है। जिससे तेज पानी की धारा में भी ये नावें फर्राटा बर सकती हैं।

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