Pronoun Illness: सोशल मीडिया पर सर्वनाम को लेकर छिड़ी बहस से जुड़ी किसी पोस्ट के हटने के बारे में सुना है? ऐसा हुआ है और यह वाकया ओला के सीईओ भाविश अग्रवाल के साथ हुआ है। उनकी एक पोस्ट सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म लिंक्डइन (LinkedIn) से हटाई गई और इसकी वजह सर्वनाम से जुड़ी एक बहस है। इसे लेकर अब ओला के सीईओ ने लिंक्डइन पर हल्ला बोला है। उन्होंने दावा किया कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) टूल भारतीय यूजर्स पर एक राजनीतिक विचारधारा थोप रहा है जो असुरक्षित और भयावह है। ओला के सीईओ ने लिखा कि पोस्ट को असुरक्षित बताना तो लिंक्डइन के अधिकार क्षेत्र में है और वह ठीक यही बताना चाहते हैं कि क्यों हमें अपनी तकनीक और एआई भारत में ही बनाने की जरूरत है, नहीं तो हम सब किसी और के राजनीतिक उद्देश्यों के लिए चारे के रूप में इस्तेमाल होंगे।
सोमवार को भाविश अग्रवाल ने X (पूर्व नाम Twitter) 6 मई को एक ट्वीट किया था। इसमें उन्होंने एक स्क्रीन शॉट साझा किया था जिसमें लिंक्डइन के एआई बॉट से अपने खुद के बारे में पूछा गया जवाब था। इसमें भाविश ने पूछा था कि भाविश अग्रवाल कौन हैं?, जिसके जवाब में चैटबॉट ने जो जवाब भेजा था, उसमें सीईओ को संबोधित करने के लिए They और Their का इस्तेमाल किया गया था। इसी को लेकर भाविश बिफर गए। उन्होंने X पर लिखा कि भारत में हममें से अधिकतर लोगों को सर्वनाम के बीमारी के राजनीति के बारे में कोई अंदाजा भी नहीं है। उन्होंने लिखा कि लोग ऐसा करते हैं क्योंकि यह हमारे कॉरपोरेट कल्चर का हिस्सा बन चुका है। उन्होंने आगे लिखा कि बेहतर यही है कि इस बीमारी को वापस वहीं भेज दिया जाए, जहां से यह आया है। उन्होंने लिखा कि हमारी संस्कृति में सबके लिए सम्मान है और किसी नए सर्वनाम की जरूरत नहीं है।
अब इसी से जुड़ी पोस्ट उन्होंने लिंक्डइन पर की थी जिसे लिंक्डइन ने हटा दिया। इसी को लेकर उन्होंने आज 9 मई को X पर लिखा है कि लिंक्डइन का एआई टूल भारतीय यूजर्स पर एक राजनीतिक विचारधारा थोप रहा है जो असुरक्षित और भयावह है।
Ola CEO के नजरिए पर मिली-जुली प्रतिक्रिया
भाविश अग्रवाल के ट्वीट को मिली-जुली प्रतिक्रिया मिल रही है। कई तो उनके नजरिए से सहमत हैं तो कुछ यूजर उनके नजरिए के खिलाफ हैं। । एक यूजर ने लिखा है कि वह उनसे पूरी तरह सहमत हैं। यह पूरी तरह से एजेंडा है। एक और यूजर ने टिप्पणी की है कि वह ओला के सीईओ से इस बात पर सहमत नहीं हैं, यह एक खतरनाक मिसाल है। तकनीकी आतंकवाद के समान। तकनीक के इस्तेमाल के लिए वैल्यू से समझौता, किसी भी हाल में नहीं।