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कोरोना काल में चली गई नौकरी, खुला नया द्वार, लकड़ी की ऑयल एक्सपेलर मशीन से हो रही है बंपर कमाई

कोरोना वायरस महामार के दौरान न जाने कितने लोगों की मौत हुई थी। इस दौरान बहुत से लोग बेरोजगार भी हुए थे। इस बेरोजगारी की लिस्ट में महाराष्ट्र के पप्पू शिंदे भी थे। शिंदे अपने गांव लौट गए। इसके बाद गांव में उन्होंने लकड़ी की ऑयल एक्सपेलर मशीन लगाई और आज मोटी कमाई कर रहे हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 18, 2024 पर 6:39 PM
कोरोना काल में चली गई नौकरी, खुला नया द्वार, लकड़ी की ऑयल एक्सपेलर मशीन से हो रही है बंपर कमाई
पप्पू शिंदे ने गांव में ऑयल मिल का बिजनेस शुरू किया और आज बंपर कमाई कर रहे हैं।

पूरी दुनिया में कोरोना वायरस महामारी से हड़कंप मच गया था। करीब 3 साल तक लोग घरों में कैद होने के मजहबूर हो गए। हर तरफ लाशों का अंबार लगा था। न जाने के कितने बेगुनाह लोग एक एक झटके में ताबूत बनते जा रहे थे। यह वो दौर था, जिसमें लोगों की नौकरियां भी चली गईं। बहुत से लोगों के खाने के लाले पड़ गए। कुछ ऐसा ही महाराष्ट्र के पप्पू शिंदे के साथ भी हुआ। कोरोना काल में पप्पू की नौकरी चली गई। वो एक बड़ी कंपनी में बतौर सुरवाइजर काम कर रहे थे। ऐसे में पप्पू शहर की अपनी जिंदगी छोड़कर अपने गांव लौट गए। यहां उन्होंने लकड़ी की ऑयल एक्सपेलर मशीन लगाई। इससे आज बंपर कमाई कर रहे हैं। लकड़ी की बनी हुई घानी में तेल पेरने का कारोबार शुरू किया।

पप्पू शिंदे को मार्केटिंग के बारे में कोई अनुभव नहीं था। लिहाजा उनके पास सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि आखिर कौन सा बिजनेस शुरू किया जाए। ऐसे में उन्होंने 4-5 लाख रुपये लगाकर लकड़ी ऑयल एक्सपेलर मशीन लगाई। इसके बाद पप्पू की किस्मत के दरवाजे खुल गए। आज वो अपने इस बिजनेस से 40,000-50,000 रुपये हर महीने कमा रहे हैं।

पप्पू शिंदे को न बिजनेस और न ही मार्केटिंग की नॉलेज

पप्पू शिंदे महाराष्ट्र के धाराशिव जिले के रहने वाले हैं। इस जिले के आमतौर पर रहने वाले लोग पुणे की कई कंपनियों मे नौकरी करते हैं। पप्पू भी पुणे की एक कंपनी में बतौर सीनियर सुपरवाइजर काम करने लगे। इसके लिए उन्हें हर महीने 35,000 रुपये महीना मिलते थे। हालांकि कोरोना काल में कंपनी बंद हो गई। इससे पप्पू शिंदे की नौकरी भी चली गई। नौकरी छोड़ने के बाद पप्पू शिंदे गांव लौट आए। इसके बाद उनके मन मं कुछ कर गुजरने की जिद थी। लेकिन उनके पास पैसे भी नहीं थे कि कोई बड़ा बिजनेस शुरू कर सके। वो इस उधेड़बुन में रहते कि आखिर कौन सा बिजनेस शुरू किया जाए। उन्हें बिजनेस का कोई ज्ञान नहीं था। इसके साथ ही उन्हें मार्केटिंग के बारे में भी केई जानकारी नहीं थी।

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