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Sedition Law: भगत सिंह, गांधी और नेहरू जैसी कई बड़ी हस्तियों पर दर्ज हुआ मुकदमा, जानें क्या है ब्रिटिश काल से चला आ रहा ये राजद्रोह कानून

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उसने उचित फोरम की तरफ से राजद्रोह जुड़े कानून का दोबारा से विचार करने का फैसला किया है। आइए जानतें है राजद्रोह कानून का इतिहास

MoneyControl Newsअपडेटेड May 11, 2022 पर 2:30 PM
Sedition Law: भगत सिंह, गांधी और नेहरू जैसी कई बड़ी हस्तियों पर दर्ज हुआ मुकदमा, जानें क्या है ब्रिटिश काल से चला आ रहा ये राजद्रोह कानून
क्या है ब्रिटिश काल से चला आ रहा ये राजद्रोह कानून (FILE PHOTO)

Sedition Law Explained: देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट (SC) ने बुधवार को एक बेहद ही अहम आदेश पारित किया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि राजद्रोह कानून (Sedition Law) पर दोबारा विचार और फिर से जांच पूरी होने तक, IPC की धारा 124A के तहत कोई नया मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि यह प्रक्रिया पूरी होने तक इस कानून के तहत पहले से मुकदमों का सामने कर रहे आरोपी भी जमानत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

दरअसल केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उसने उचित फोरम की तरफ से राजद्रोह जुड़े कानून का दोबारा से विचार करने का फैसला किया है। सरकार ने अदालत से यह अनुरोध भी किया कि वह राजद्रोह के दंडनीय कानून की संवैधानिक वैधता का अध्ययन करने में समय नहीं लगाए।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शीर्ष अदालत में दायर एक हलफनामे में कहा कि उसका निर्णय औपनिवेशिक चीजों से छुटकारा पाने के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों के अनुरूप है। पीएम मोदी नागरिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के सम्मान के पक्षधर रहे हैं। इसी भावना से 1,500 से ज्यादा अप्रचलित हो चुके कानूनों को खत्म कर दिया गया है।

ये सब वे जानकारी थी, जिसके कारण राजद्रोह कानून वर्तमान में चर्चाओं में हैं। अभी एक नजर डालते हैं, इस कानून के एतिहासिक पहलू पर। साथ ही विस्तार से जानते हैं, आखिर इस कानून को 'औपनिवेशिक काल' का कानून क्यों कहा जाता है।

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