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Sedition Law: दोबारा विचार होने तक राजद्रोह कानून के तहत फिलहाल दर्ज नहीं होगा कोई केस, आरोपी भी कर सकते हैं जमानत की मांग: SC

Sedition Law: देश की सबसे बड़ी अदालत ने आदेश दिया कि जब तक कानून पर दोबारा विचार की कवायद पूरी नहीं हो जाती, तब तक IPC की धारा 124A के तहत कोई नया मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा

MoneyControl Newsअपडेटेड May 11, 2022 पर 12:37 PM
Sedition Law: दोबारा विचार होने तक राजद्रोह कानून के तहत फिलहाल दर्ज नहीं होगा कोई केस, आरोपी भी कर सकते हैं जमानत की मांग: SC
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोबारा विचार होने तक राजद्रोह कानून के तहत फिलहाल नहीं दर्ज होगा कोई केस

सुप्रीम कोर्ट (SC) ने बुधवार को केंद्र सरकार को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124A (Sedition Law) के प्रावधानों पर फिर से विचार करने और जांच करने की अनुमति दे दी है। इस धारा के तहत राजद्रोह या देशद्रोह (Sedition) का मुकदमा दर्ज किया जाता है।

इसमें बड़ी बात ये है कि देश की सबसे बड़ी अदालत ने आदेश दिया कि जब तक कानून पर दोबारा विचार की कवायद पूरी नहीं हो जाती, तब तक IPC की धारा 124A के तहत कोई नया मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि इसके तहत पहले से मुकदमों का सामने कर रहे आरोपी भी जमानत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) ने बुधवार को देशद्रोह कानून मामले में सुनवाई के दौरान कह, "हमने विस्तार से चर्चा की है। हम यह आदेश पारित कर रहे हैं। भारत सरकार शुरुआती तौर पर अदालत की उस राय से सहमत है कि धारा 124A की कठोरता वर्तमान सामाजिक परिवेश के अनुरूप नहीं है।"

CJI ने कहा, "हमें उम्मीद और भरोसा है कि केंद्र और राज्य IPC की धारा 124A के तहत कोई भी FIR दर्ज करने से परहेज करेंगे।" देशद्रोह कानून मामले में अगली सुनवाई अब गुरुवार को होगी।

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