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Success Story: अस्पताल में किताब के पन्ने फाड़ कर की UPSC की तैयारी, पहले प्रयास में ही बन गईं IAS

Success Story: अक्षिता गुप्ता ने अपने MBBS के तीसरे साल से ही यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने अस्पताल में पढ़ाई के दौरान दिन-रात मेहनत करना शुरू कर दिया। गुप्ता ने सिविल सेवा परीक्षा में 69वीं रैंक हासिल की। 23 साल की उम्र में डॉक्टर से IAS बन गईं। वो खुद बताती हैं कि कैसे उन्‍होंने किताबों के पन्‍ने फाड़ कर सफलता हासिल की है

Edited By: Jitendra Singhअपडेटेड May 17, 2023 पर 2:43 PM
Success Story: अस्पताल में किताब के पन्ने फाड़ कर की UPSC की तैयारी, पहले प्रयास में ही बन गईं IAS
इंटरव्यू में अक्षित से पूछा गया कि अपने नाम का अर्थ बताओ तो उन्होंने कहा कि जो आसानी से न टूटे

Success Story: अगर मन में कोई लक्ष्य तय कर लिया जाए और मेहनत का रास्ता अपनाया जाए, तो तय लक्ष्य तक आसानी पहुंचा जा सकता है। इसके लिए कड़ी मेहनत की जरूरत होती है। ऐसे ही संघ लोक सेवा आयोग (Union Public Service Commission – UPSC) की परीक्षा को पास करना आसान नहीं है। देश में लाखों लोग इस परीक्षा को देते हैं। लेकिन सफलता मुट्ठी भर लोगों को ही मिल पाती है। आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसी IAS अफसर की। जिन्होंने अस्पताल में रहते हुए सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी औरक अपने पहले ही प्रयास में सफलता का परचम फहराया है।

डॉ. अक्षिता गुप्ता ( Dr. Akshita Gupta) ने सिविल सेवा परीक्षा पास कर IAS बनने का अपना सपना पहली बार में पूरा कर लिया। गुप्ता ने साल 2020 में पहले ही प्रयास में 69वी रैंक हासिल कर IAS बनने का गौरव हासिल किया।

पन्ने फाड़कर बनीं IAS

अक्षिता बताती हैं कि वो अस्पताल में 14 घंटे की नौकरी करने के साथ-साथ IAS की परीक्षा के लिए तैयारी करती थीं। वहां उन्‍हें जब भी 15 मिनट का ब्रेक मिलता, तब वे पढ़ाई कर लेती थीं। आप जानते ही हैं कि UPSC एग्‍जाम में ऑप्शनल सब्‍जेक्‍ट भी रहता है। ऐसे में उन्‍होंने इस विषय की तैयारी के लिए मास्‍टर ट्रिक अपनाई। उन्‍होंने ऐसे विषयों को चुना, जो उनके मेडिकल से संबंधित थे। इसके चलते उन्‍हें पढ़ाई करने में बहुत मदद मिली। उन्‍होंने सर्जरी और शरीर रचना जैसे टॉपिक्स को अच्‍छे से पढ़ा। गुप्ता ने आगे बताया कि सभी मेडिसिन की किताबें खरीद ली। UPSC के सिलेबस से संबंधित सभी पन्नों को फाड़ लिया। इन किताबों को फाड़ना उनके लिए दर्दनाक था, लेकिन वे जानती थी कि ये काम वे अच्छे के लिए कर रही हैं। उन्‍होंने उन सभी पन्नों को स्टेपल किया और उसके चैप्टर बना लिए। जिससे उन्‍हें पढ़ाई में आसानी हो गई।

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