Success Story: सब्जी बेचने वाले के बेटे ने कर दिया कमाल, पहले ही कोशिश में बन गया अफसर

Success Story: भोपाल के आशीष सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग 2022 में 841 अंक हासिल किए और शिक्षा विभाग में असिस्टेंट डायरेक्टर बने। आर्थिक तंगी के बावजूद, आशीष ने कड़ी मेहनत की, रोज़ 10 घंटे पढ़ाई की और सीनियर से मार्गदर्शन लिया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को दिया

अपडेटेड Jan 19, 2025 पर 2:01 PM
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Success Story: आशीष ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को दिया।

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा परीक्षा 2022 का रिजल्ट हाल ही में जारी हुआ और इस बार भोपाल के आशीष सिंह चौहान ने शानदार सफलता प्राप्त की। आशीष ने 841 अंक हासिल किए और उन्हें शिक्षा विभाग में असिस्टेंट डायरेक्टर के पद पर चुना गया। आशीष का परिवार आर्थिक रूप से मजबूत नहीं था। उनके पिता अजब सिंह भोपाल में सब्जी का ठेला लगाते हैं।आशीष की मेहनत और माता-पिता के समर्थन ने उन्हें इस सफलता तक पहुंचाया। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा बैरागढ़ के सरकारी स्कूल से की और ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन शासकीय हमीदिया कॉलेज से किया।

आशीष ने अपनी पहली कोशिश में ही यह सफलता हासिल की। उनके मुताबिक पढ़ाई में कठिनाई आने के बावजूद उनके परिवार ने हमेशा उनका उत्साह बढ़ाया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

आर्थिक तंगी के बावजूद मजबूत इरादा


आशीष का परिवार बहुत ही कम आय वाले वर्ग से है और उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। उनके पिता अजब सिंह भोपाल के संत हिरदाराम नगर में सब्जी का ठेला लगाते हैं जिससे परिवार का गुजारा चलता है। वे किराए के मकान में रहते हैं। बावजूद इसके आशीष ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और सफलता प्राप्त की।

शिक्षा में कड़ी मेहनत और परिवार का समर्थन

आशीष ने अपनी स्कूली शिक्षा बैरागढ़ के शासकीय मॉडल स्कूल से की और फिर शासकीय हमीदिया कॉलेज से ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की। आशीष का एक भाई भी है जो बैरागढ़ में एक साड़ी की दुकान में सेल्समैन के रूप में काम करता है। फिलहाल आशीष इंदौर से पीएचडी कर रहे हैं।

परिवार का हमेशा साथ और हौसला

आशीष ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को दिया जो हमेशा उन्हें पढ़ाई जारी रखने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहे। आशीष ने बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति इतनी बेहतर नहीं थी कि वे कोचिंग की फीस भर पाते लेकिन उन्होंने 10 घंटे रोजाना पढ़ाई की और सीनियर से मार्गदर्शन लिया। यह उनकी पहली कोशिश थी और पहले प्रयास में ही उन्होंने सफलता प्राप्त कर ली।

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