Vijay Mallya Case: अवमानना मामले में भगोड़े कारोबारी विजय माल्या को 4 महीने की जेल, सुप्रीम कोर्ट ने 2000 रुपये का जुर्माना भी लगाया

सुप्रीम कोर्ट ने विजय माल्या पर 4 महीने की जेल की सजा और 2000 रुपए का जुर्माना लगाया है। सुप्रिम कोर्ट ने 2017 में विजय माल्या को अवमानना ​​और अदालत से जानकारी छुपाने के लिए दोषी पाया गया था

अपडेटेड Jul 11, 2022 पर 11:20 AM
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सुप्रीम कोर्ट ने विजय माल्या को चार सप्ताह के अंदर ब्याज के साथ 40 मिलियन डालर जमा करने के लिए कहा है

सुप्रीम कोर्ट ने 9,000 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक लोन धोखाधड़ी मामले में आरोपी एवं भगोड़े कारोबारी विजय माल्या (Vijay Mallya Case) को 4 महीने जेल की सजा सुनाई है। साथ ही शीर्ष अदालत ने 2000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है। सुप्रीम कोर्ट ने विजय माल्या को 4 सप्ताह के अंदर ब्याज के साथ 40 मिलियन डालर जमा करने के लिए कहा है। ऐसा न करने पर उनकी संपत्तियों को कुर्क करने के आदेश दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में विजय माल्या को अवमानना ​​और अदालत से जानकारी छुपाने के लिए दोषी पाया गया था। माल्या पर उनके किंगफिशर एयरलाइन से जुड़े 9,000 करोड़ रुपये के बैंक लोन घोटाले में शामिल होने का आरोप है। अवमानना के मामले में उसे दोषी करार दिया गया है।

जस्टिस ललित, जस्टिस एस रवीन्द्र भट और जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा की पीठ ने इस मामले की सजा की अवधि तय करने संबंधी अपना फैसला 10 मार्च को सुरक्षित रख लिया था। उस वक्त कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि माल्या के खिलाफ सुनवाई में अब कोई प्रगति नहीं हो सकती।


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न्यायालय ने अवमानना कानून के विभिन्न पहलुओं पर वरिष्ठ वकील एवं न्याय मित्र जयदीप गुप्ता की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। पीठ ने पूर्व में माल्या का प्रतिनिधित्व कर चुके वकील को इस मामले में 15 मार्च तक लिखित दलीलें पेश करने की अनुमति दी थी।

बहरहाल, माल्या के वकील ने 10 मार्च को कहा था कि ब्रिटेन में रह रहे उनके मुवक्किल से कोई निर्देश नहीं मिल सका है इसलिए वह पंगु हैं। अवमानना के मामले में दी जाने वाली सजा की अवधि को लेकर उनका (माल्या का) पक्ष रख पाने में असहाय हैं।

पीठ ने कहा कि हमें बताया गया है कि (माल्या के खिलाफ) ब्रिटेन में कुछ मुकदमे चल रहे हैं। उसने कहा कि हमें नहीं पता, कितने मामले लंबित हैं। मुद्दा यह है कि जहां तक हमारे न्यायिक अधिकार क्षेत्र का प्रश्न है तो हम कब तक इस तरह चल पाएंगे।

शीर्ष अदालत ने माल्या को दिए गए लंबे वक्त का हवाला देते हुए 10 फरवरी को सुनवाई की तारीख तय कर दी थी। कोर्ट ने कहा कि भगोड़े कारोबारी को व्यक्तिगत तौर पर या अपने वकील के जरिये पेश होने का अंतिम मौका दिया था। माल्या को अवमानना के लिए 2017 में दोषी ठहराया गया था और उनकी प्रस्तावित सजा के निर्धारण के लिए मामले को सूचीबद्ध किया जाना था।

सुप्रीम कोर्ट ने 2017 के फैसले पर पुनर्विचार के लिए माल्या की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिका 2020 में खारिज कर दी थी। कोर्ट ने अदालती आदेशों को धता बताकर अपने बच्चों के अकाउंट में चार करोड़ डॉलर भेजने को लेकर उन्हें अवमानना का दोषी माना था।

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